सुरियावां। रुक-रुक कर हो रही बारिश से वरुणा नदी उफान पर चल रही है। इससे वरुणा से सटे 50 गांवों के किसानों की 500 एकड़ से ज्यादा फसल जलमग्न हो गई है। करीब 20 दिन से खेतों में पानी भरा होने के कारण धान, मूंग और उड़द समेत अन्य फसलें सड़ गई हैं। इससे कर्ज लेकर खेती कर रहे किसानों की कमर टूट गई। प्रशासन की ओर से मुआवजा के लिए अभी तक सर्वे न कराने से किसानों में नाराजगी है। जिले के उत्तरी छोर से होकर गुजरी वरुणा नदी दुर्गागंज, सुरियावां, मोढ़ और भदोही होते हुए वाराणसी निकल जाती है। साल के आठ महीने सूखी रहने वाली वरुणा बारिश के दिनों में किसानों के लिए आफत बन जाती है। अधिक बारिश होने पर गहराई कम होने के कारण नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल जाता है। 22 जुलाई से लेकर अब तक हुई बारिश से वरुणा का पानी तटवर्ती 50 से अधिक गांवों को प्रभावित कर रहा है। करीब 20 दिनों से जलस्तर कम न होने के कारण धान समेत अन्य फसलें डूबकर नष्ट हो गई हैं। कर्ज लेकर खाद, बीज का इंतजाम और कड़ी मेहनत से खेती करने वाले किसानों की इससे कमर टूट गई। न तो इसका मुआवजा किसानों को मिलता है और न ही योजना का लाभ। अब तक राजस्व विभाग की ओर से किसी कर्मचारी के न आने से किसानों में नाराजगी है। वरुणा के पानी से कीर्तिपुर, हरिपुर, सरायकंसराय, अभिया, अभिया बन, पुरमनोहर, तुलापुर, छतमा, तिलकनाथ, कैड़ा, बहुता चकडाही, भोरापुर, लेखाईपुर, भीमसेनपुर, अबरना, बहुता सरदार, सुजानगिर, चकटेकी, हरिहरपुर, बलिकापुरा, मर्दांशाहपुर, पुरेबदल, सांडा, विसापुर, बिसही, कुशही, गोदमा, चौगना, गोपीपुर, सुजानपुर, मधुपट्टी, करियावं समेत 50 गांव जबकि जौनपुर के बरसठी ब्लॉक के बनकट, कारो, गहरपुर, मनौरा, गहिली, कुसा, विजयगिर आदि गांवों के किसान प्रभावित होते हैं। किसान रामधारी सिंह, कैलाश सिंह, दिनेश शुक्ल, शिव कुमार पाल, राधेश्याम, कमलेश, कैलास यादव, कमला शंकर, हरिनाथ, दलाई , राम प्रसाद, धर्मराज, देवराज, दयाशंकर, धीरज सिंह, अनिल सिंह ने कहा कि 20 दिन से बाढ़ का पानी जमा रहने से फसल नष्ट हो गई है। प्रशासन की ओर से इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने वाले सभी किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। जिन किसानों ने अब तक बीमा नहीं कराया है, वह जल्दी करा लें ताकि उन्हें भी लाभ मिल सके।