ज्ञानपुर। जिले की 12 ग्राम पंचायतों की जांच अभिलेख न मिलने के कारण फंस गई है। जांच अधिकारी की ओर से डीएम को पत्र देकर अवगत कराया जा रहा है। अभिलेख न उपलब्ध कराने पर ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
जिले के छह ब्लॉकों में 561 ग्रामसभाएं हैं। गांवों के विकास के लिए राज्य वित्त एवं 14वें के माध्यम से बजट भेजा जाता है। इससे शौचालय, नाली, खड़ंजा समेत अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा के कार्य भी होते हैं। विकास कार्यों को कराने में कई ग्राम पंचायतों की ओर से मानक को दरकिनार कर दिया जाता है। इसको लेकर ग्रामीण मुखर होते हैं तो उच्चाधिकारियों की ओर से जांच कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में करीब 35 ग्राम पंचायतों की जांच कराई गई। इसमें जांच के बाद 23 प्रधान और सेक्रेटरी पर विभागीय कार्रवाई की गई, लेकिन 12 ऐसी ग्राम पंचायतों की जांच इसलिए नहीं हो सकी, क्योंकि वहां की ग्राम पंचायतें अभिलेख देने में आनाकानी करती रहीं। ऐसे गांवों में औराई ब्लॉक का सायर गांव, अभोली का गंगारामपुर, कनकपुर, दानूपुर पश्चिमपट्टी, डीघ का कौलापुर और भदोही का संवरपुर समेत गांव शामिल है। अभिलेख न उपलब्ध होने पर जांच अधिकारी उच्चाधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं। गत दिनों पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने कनकपुर गांव के सेक्रेटरी के खिलाफ डीएम को पत्र लिखा, जिसमें दर्शाया गया कि संबंधित सेक्रेटरी की ओ से अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। कनकपुर ही नहीं अन्य गावों में भी सेक्रेटरी अभिलेख देने से आनाकानी कर रहे हैं। डीएम ने मसले को गंभीरता से लिया है। संबंधित सेक्रेटरी की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट डीपीआरओ से मांगी। माना जा रहा है कि डीएम के स्तर से कुछ सेक्रेटरी पर निलंबन की गाज गिर सकती है। जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि कुछ ग्राम पंचायतों में सेक्रेटरी अभिलेख नहीं दे रहे हैं। ऐसे सेक्रेटरी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।