वाराणसी। लंका स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सामने एटीएम कैश वैन से 26.5 लाख से लूटे जाने के मामले में कई स्तर पर हुई चूक ने तफ्तीश में खासी दिक्कतें पैदा की। सबसे पहली और बड़ी चूक कैश वैन कर्मचारियों से यह हुई कि वारदात लगभग 6:30 बजे हुई और पुलिस को सूचना 7:30 बजे के लगभग दी गई। वहीं, पुलिस की लापरवाही का आलम यह रहा लंका भर में कैश वैन से रुपये लेकर भागने का शोर हो गया लेकिन चंद कदम दूर पर मालवीय चौराहा स्थित पिकेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को भनक तक नहीं लगी। इस एक घंटे की देरी के कारण बदमाश पुलिस से काफी दूर निकल गए और चेकिंग तकरीबन सवा घंटे बाद शुरू हो सकी। कर्मचारियों का कहना था कि वैन में एक करोड़ से ज्यादा रुपये थे। उनका मिलान करने की वजह से पुलिस को सूचना देने में देरी हुई।
पुलिस की तफ्तीश के दौरान और सीसीटीवी फुटेज से सामने आया कि एटीएम में कैश भरने के लिए कर्मचारी आशीष व विपर्व और दोनों सुरक्षाकर्मी भरने चले गए तो वैन के पास कोई नहीं था। जबकि नियमानुसार चालक और एक गन मैन वैन के पास ही होना चाहिए। वहीं, युवक ने जिस तरह से वैन का दरवाजा खोला उससे साफ पता लगा कि वो लॉक नहीं था और अंदर भी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी। नियम के अनुसार वैन का दरवाजा लॉक होना चाहिए और उसके अंदर भी सुरक्षा में ही कैश बॉक्स होना चाहिए। वहीं, घटना के संबंध में चालक, दोनों गार्ड सहित पांचों कर्मचारियों के अलग-अलग बयान भी पुलिस को खासा उलझाते रहे। सभी खुद को निर्दोष और एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे थे। पुलिस हिरासत में लिए गए पांचों कर्मचारियों के पारिवारिक, सामाजिक और आपराधिक विवरण जुटाने में लगी हुई थी।