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जहां विष्णु ने पखारे थे पांव, वहां खड़ा होना भी मुश्किल

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वाराणसी। शिव की नगरी काशी में गंगा की हालत बेहद खराब है। घाटों से दूर हुई गंगा के जल से उठ रही बदबू तो गंगा किनारे खड़े होने भी नहीं होने दे रही है। वरुणा गंगा के संगम पर गंगा की दशा देखकर कोई नहीं कह सकता है कि कभी भगवान विष्णु ने यहीं अपने पद पखारे होंगे। विष्णुपादोदित तीर्थ के रूप में मशहूर वरुणा गंगा के संगम पर अब सिर्फ शहर के सीवेज से लबालब वरुणा का पानी गंगा में निरंतर प्रवाहित हो रहा है। हालत ऐसी है कि इसके आसपास खड़ा होना भी मुश्किल है। आदिकेशव से लेकर गायघाट तक स्थितियां बेहद भयावह हो चुकी हैं। कहीं जानवर मरे पड़े हैं तो कहीं शहर के नाले का पानी गंगा में गिर रहा है।
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आदिकेशव घाट के थोड़ा पहले स्थित वरुणा गंगा के संगम पर शहर की पूरी गंदगी, सीवर और नालों के पानी को समेटे हुए वरुणा बेेधड़क, बेलौस होकर गंगा में गिर रही है। गंदगी का आलम यह है कि इसके आसपास जलीय जीवों और आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो चुकी है। बदबू के कारण वहां पर दो मिनट खड़ा होना भी बेहद मुश्किल है। आदिकेशव घाट से पर गंगा की दूरी 70 फीट से अधिक हो चुकी है। दोनों तरफ से सूख रही गंगा के किनारे सिमटते जा रहे हैं। आदिकेशव घाट पर से सीधा नाला गंगा में आकर मिल रहा है। इसके आगे जब हम खिड़किया घाट की तरफ बढ़ते हैं तो तेज आवाज करता हुआ नाला भी तेजी से गंगा में गिर रहा है। भैंसासुर घाट, रानी घाट, प्रहलाद घाट, सक्का घाट, तेलियानाला घाट, नदेंश्वर घाट, गोला घाट और गायघाट तक छोटे-छोटे नालों से पानी होकर सीधे गंगा में गिर रहा है।
आदिकेशव घाट के महंत ओमप्रकाश तिवारी का कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण तो अब लोगों ने गंगा में स्नान करना भी छोड़ दिया है। फरवरी में ही गंगा ने घाट छोड़ना शुरू कर दिया है तो गर्मी के मौसम में हालत और भी ज्यादा खराब हो जाएगी।
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सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो यह दावा करता है कि गंगा में रोजाना 250 एमलडी सीवेज गिराया जा रहा है लेकिन वरुणा संगम और खिड़किया घाट पर गिर रहे नाले को देखकर समझा जा सकता है कि आंकड़ों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है। स्वतंत्र जांच एजेंसियों के अनुसार आंकड़े बताते हैं कि गंगा में रोजाना 350 एमएलडी से अधिक सीवेज गिराया जा रहा है। घुलनशील आक्सीजन की मात्रा वरुणा संगम पर खतरनाक स्तर तक कम होने के कारण जलचरों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है। कुछ साल पहले गंगा में घुलनशील आक्सीजन का स्तर पांच या छह मिलीग्राम प्रति लीटर होता था लेकिन अस्सी घाट पर यह स्थिति एक मिलीग्राम और आदिकेशव घाट पर घुलनशील आक्सीजन की स्थिति शून्य तक पहुंच गई है। वरुणा संगम पर फीकल कॉलीफार्म की स्थिति तो छह करोड़ के पास पहुंच चुकी है। वरुणा के संगम पर बीओडी लेवल 45 मिलीग्राम के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बीओडी का खतरनाक स्तर बताता है कि गंगा में आर्गेनिक लोड कितना है।
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