वाराणसी। मैहर घराने के मशहूर सितार वादक उस्ताद शाहिद परवेज ने मंगलवार की रात स्वरों के समन्वय के जरिए रागों की माला पिरोई। उन्होंने सितार पर गायकी अंग की बंदिशों को बजाकर अपने खास अंदाज और मिजाज से संगीत रसिकों का दिल जीत लिया। यह संगीत निशा संगीत-कला को समर्पित संस्था कला प्रकाश की ओर से महमूरगंज स्थित सगुन लॉन के भव्य पंडाल में आयोजित की गई थी।
राजशाही झूमरों से सजे भव्य पंडाल में शाम सात बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ संगीत संध्या की शुरुआत हुई। बनारस घराने के अलावा विदेशी संगीत प्रेमियों से खचाखच भरी दीर्घा से हर हर महादेव के जयघोष तब गूंजने लगे, जब उस्ताद मंच पर आए। उन्होंने सबसे पहले सितार पर राग जोग की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बाद उन्होंने विलंबित एक ताल और फिर तीन ताल द्रुत लय की गत बजाकर संगीत रसिकों को मुग्ध किया। इसके बाद उन्होंने राग पीलू पर सितार के तारों को छेड़ना शुरू किया। पीलू की बंदिश के दौरान ही उन्होंने राग माला सजानी शुरू कर दी। राग काफी, राग शिव रंजनी पर बढ़त के अलावा रागों विविध रूपों को उन्होंने बहुत तैयारी के साथ पेश किया तो तालियां गूंजने लगीं। अंत में उन्होंने राग सिंधोरा में बंदिश बजाकर विदा ली। तबले पर कोलकाता के हिंडोल मजूमदार ने संगत की। इस मौके पर डॉ. प्रवीण उद्धव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव, ललित कुमार, बांसुरी वादक अतुल शंकर, कुमार अग्रवाल समेत तमाम कलाकार और संगीत प्रेमी मौजूद थे। आगतों के प्रति धन्यवाद कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने व्यक्त किया।