ज्ञानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने किसानों का कर्जमाफी का एलान भले ही माह भर पूर्व कर दिया गया है लेकिन अब तक कोई गाइडलाइन न आने से बैंक अफसर असमंजस मे हैं। कर्जमाफी के लिए जिले में 23 हजार किसान चिह्नित हैं, जिन पर विभिन्न बैंकों से करीब 125 करोड़ बकाया है। बैंकों की ओर से अब तक किसानों को एक भी नोटिस नहीं भेजा गया।
खेतीबारी कर जीवकोपार्जन करने वाले किसानों को मानसून से राहत न मिलने से अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। जिससे खेतीबारी के लिए बैंको से लेने वाला कर्ज वह वापस नहीं कर पाते। कर्ज और ब्याज जोड़कर धीरे-धीरे उन पर 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक का कर्ज हो जाता है। कुछ किसान तो पैसा जमा कर देते हैं लेकिन 95 फीसदी किसान कर्जमाफी के इंतजार में जमा नहीं करते। विस चुनाव में भाजपा ने किसानों का कर्जमाफ करने का एलान किया था। सूबे में सरकार बनने के एक माह बाद कैबिनेट की बैठक में किसानों का कर्जमाफ करने का निर्णय लिया गया। करीब एक माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी शासन से ऋणमाफी के लिए कोई गाइडलाइन अब तक नहीं आया। जिससे बैंको के अधिकारी और किसान दोनों परेशान हैं। डीघ के कूड़ी कला के किसान राम अछैवर ने कहा कि सरकार की ओर से कर्जमाफी का एलान हो चुका है लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिल सकी है। अभोली के भानीपुर के किसान मगन सिंह ने बताया कि कर्जमाफी को लेकर सरकार का रवैया ठीक नहीं है। कैबिनेट की बैठक में निर्णय होने के बाद भी अब तक कुछ नहीं हुआ।
एलडीएम लीड बैंक अमिताभ सेन ने बताया कि बैंक के उच्चाधिकारियों और शासन से कर्जमाफी को लेकर कोई पत्र नहीं आया है, हालांकि बैंकों की ओर से किसानों को नोटिस नहीं भेजा गया। दूसरे बकाएदारों को रूटीन के अनुसार नोटिस भेजा जा रहा है।