पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जनपद न्यायाधीश ने कहा कि परिवार समाज की इकाई है, ऐसी स्थिति में न्यायालय की भूमिका पारिवारिक समरसता बनाने के परिप्रेक्ष्य में बहुत महत्वपूर्ण है। न्यायालय का कार्य वास्तव में परिवारों को जोड़ना है न कि तोड़ना है। कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय अनिरुद्ध कुमार तिवारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने पारिवारिक न्यायालय के माध्यम से 17 वैवाहिक जोड़ों को पुनः साथ रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में बनारस व सेंट्रल बार महामंत्री एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी आलोक कुमार व प्रवीण कुमार सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जीएम बीएन सिंह व सभी न्यायिक अधिकारी रहे।
लोक अदालत एक ऐसा माध्यम बनकर उभरा है, जिससे हम अपना समय गंवाए बिना गंभीर से गंभीर मामलों में निस्तारण तक पहुंच सकते हैं। - संजीव शुक्ला, जिला जज, वाराणसी