फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

45 दिन का काम पांच साल से लटका

विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निगम के कर्मचारियों की कार्यशैली का जवाब नहीं। जिस मकान के दाखिल खारिज के लिए महज 45 दिन का समय लगता है उसके लिए पांच साल होने को आ गए लेकिन अभी तक भवन स्वामियों को पीले कार्ड के लिए दौड़ाया जा रहा है। भाग दौड़ से आजिज आकर भवन स्वामियों ने नगर निगम के आला अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनता ही नहीं।
विज्ञापन


ऐसा एक नहीं सौ से अधिक मामला मवईया वार्ड और आसपास में उजागर हुआ है। इससे 90 वार्ड वाले नगर निगम की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगे हैं। मामला नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी के संज्ञान में आने पर उन्होंने वरुणा पार के जोनल अधिकारी महातम यादव पर नाराजगी जताते हुए लापरवाह कर्मियों की सूची 28 फरवरी तक तलब की है।

मसलन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस काशी का प्रतिनिधित्व संसद में करते हैं उनके नगर निगम का यह हाल है। यही नहीं महापौर से लेकर अधिकतर पार्षद भाजपा के ही हैं। वर्ष 2010 में नगर निगम कार्यकारिणी का निर्णय था कि 45 दिन में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कर पीला कार्ड जारी हो जाना चाहिए मगर ऐसा हो नहीं रहा।
विज्ञापन


मवईया वार्ड की पार्षद दुर्गा देवी मौर्या ने नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी से शिकायत की है कि वरुणा पार जोन के उनके क्षेत्र और आसपास में मकान नंबर एलाट करने के लिए 76 आवेदन साल 2010 से धूल फांक रहे हैं। जबकि अंतिम रूप से पीला कार्ड जारी होने की 31 पत्रावलियां लंबित हैं। पार्षद ने नगर आयुक्त से पूछा कि जब एक वार्ड का यह हाल है तो बाकी 89 में क्या हो रहा होगा।

निर्धारित फीस से ज्यादा देनी होती है घूस
वाराणसी। वरासत के आधार पर दाखिल-खारिज का शुल्क 300 रुपये है तो 5 लाख के बैनामा पर 1200 रुपये, 10 लाख पर 2200 रुपये, 15 लाख पर 3200 रुपये, 20 लाख पर 4200 रुपये और 20 लाख से ऊपर पर 5200 रुपये देना होता है। इस शुल्क के अलावा लोगों को 4000 से 5000 रुपये सामान्य घर के दाखिल-खारिज और पीला कार्ड के लिए घूस देनी पड़ती है। संबंधित व्यक्ति से पैसा लेकर उसके बंटवारे की जिम्मेदारी कर विभाग के अधिकारियों पर आमतौर पर होती है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें