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दुनिया में ऐढ़े गांव छाया, ग्रामीणों का मन हर्षाया

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वाराणसी। ऐढ़े गांव के लोग इतरा रहे हैं। मन गाने-गुनगुनाने के लिए बेताब है। बात करते-करते चेहरे पर मुस्कराहट तैर जाती है। कदम थिरकते दिखते हैं। यह अनायास नहीं है। दुनिया भर से काशी आ रहे प्रवासियों के स्वागत को वे अद्वितीय और अलौकिक बनाने में सहयोगी बनकर खुद को सौभाग्यशाली मानने का मौका गंवाना नहीं चाहते हैं। गदगद ग्रामीण खुशियां बांट रहे हैं। रिश्तेदारों को गर्व से बता रहे हैं कि वे विश्व के सौ से अधिक देशों में रहने वाले भारतीयों के मेजबान हैं। गांववाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुरीद हैं और कहते हैं-कभी नहीं सोचा था कि मोदी की वजह से गांव का नाम हर किसी की जुबां पर आ जाएगा।
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प्रवासी भारतीयों को पहली बार एकजुट करने वाले हरहुआ ब्लॉक के दो हिस्सों में बंटे इस गांव के बीच रिंग रोड की दूसरी ओर 45 एकड़ में विकसित टेंट सिटी को बालेश्वर अग्रवाल नगर नाम दिया गया है। दीनदयाल हस्तकला संकुल के नजदीक ऐढ़े गांव में नई सड़कें बन गई हैं। दो महीने पहले यहां सड़कें नहीं थीं। रविवार को बिजली के खंभों पर केबल लगाई जा रही थी। गांव में स्वच्छ भारत मिशन के स्वयंसेवी अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
गांव में प्रवेश करते ही नंदलाल पांडेय मिले। कहने लगे-गांव में अचानक बहुत काम हो गए हैं। पहले सिर्फ गांव था, अब शहर जैसा लगता है। जब से गांव में सम्मेलन की चर्चा शुरू हुई। नाते-रिश्तेदार घूमने आए। सबको टेंट सिटी दिखाया और कार्यक्रम के बारे में जितनी जानकारी दे सकते थे, दी। बताया कि गांव वालों की जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया है, एक फसल का मुआवजा भी मिलेगा। यह मुआवजा दो फसलों में होने वाली आमदनी के बराबर है।
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गांव के प्रधान पदुम पाठक प्राइमरी स्कूल से बिजली के खंभे पर लगाने के लिए ट्यूबलाइट निकालते मिले। उनके पास समय कम है। चाहते हैं कि प्रधान की जिम्मेदारी में कमी न रह जाए। उनके साथ एडीओ (पंचायत) प्रमोद कुमार पाठक सफाई व्यवस्था की निगरानी में व्यस्त थे। पूछा तो आह्लादित होकर बोले- काशी आतिथ्य की परंपरा के बारे में हर किसी को बताने का अवसर मिला है। इसे यों नहीं जाने दूंगा। हालांकि गांव के लोगों को सम्मेलन के पास नहीं मिलने का शिकवा करते हुए ग्राम प्रधान बोले- पास के लिए दो सौ से अधिक लोगों का फोन आ चुका है। फिर कहा-अब जो भी हो। प्रधानमंत्री की वजह से उनके गांव में सात समंदर पार रहने वाले बड़े लोगों की बात-मुलाकात होगी। इससे सबका कुछ न कुछ लाभ ही होगा।
गांव के प्राथमिक विद्यालय में 180 छात्र-छात्राएं हैं। इनमें 20 से अधिक बच्चों ने मॉरीशस की थीम पर तैयारी की है। भारत का राष्ट्रगान, मॉरीशस का राष्ट्रगान, स्वागत गीत और सरस्वती वंदना कंठस्थ की है। बच्चे मॉरीशस के लोक नृत्य सेगा और भोजपुरी गानों पर लोक नृत्य का भी रिहर्सल कर चुके हैं। यही नहीं, उन्होंने ‘हम होंगे कामयाब एक दिन...’ के अंग्रेजी रूपांतरण ‘वी शैल ओवरकम’ की लगातार तैयारी की है। इसके लिए शिक्षकों ने पांच हजार रुपये खर्च किए हैं। बीते दिनों स्कूल का निरीक्षण करने आए प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) और जिले के नोडल अफसर रजनीश दुबे ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बताया था कि प्रवासी भारतीय उनके द्वारा तैयार कार्यक्रम देखने आएंगे। कार्यक्रम के लिए ऐढ़े के अलावा दांदूपुर का भी चयन किया गया है।
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