सुरियावां। सांसद के आदर्श गांव कैड़ा में कुछ जटिल समस्याओं से निजात मिली है, मगर शौचालय, सड़क, नाले-नालियों के लिए ग्रामीण अब भी तरस रहे हैं। जलभराव और जर्जर सड़क की समस्या ग्रामीणों के लिए मुश्किलों का सबब बनी हैं। वरुणा नदी पर पुल की जरूरत और शौचालय, प्रकाश आदि की सुविधाओं की दरकार के बीच ग्रामीण अब भी समस्याओं से जूझ रहे हैं। 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को एक-एक गांव को गोद लेकर विकास कराने पर जोर दिया। उसी क्रम में सांसद वीरेंद्र सिंह ने पहले ज्ञानपुर ब्लॉक क्षेत्र के कौलापुर और उसके बाद सुरियावां ब्लॉक के पिछड़े गांव कैड़ा को 2015-16 में गोद लिया। करीब तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में 1980 मतदाता हैं। गांव में खारे पानी की समस्या सबसे जटिल रही है। इसके निजात के लिए यहां पर सांसद की ओर से आरओ प्लांट लगवाया गया। गांव में सौर ऊर्जा, विद्युतीकरण, शौचालय, सड़कों का निर्माण हुआ, लेकिन अब भी कई बस्तियां विकास से वंचित हैं। बहुता-चकडाही से कैड़ा संपर्क मार्ग की हालत दयनीय हो गई है। गांव की एक अन्य जटिल समस्या को लेकर अब तक कोई पहल नहीं हो सकी, जो जलभराव की है। नाली का निर्माण न होने से बारिश के अलावा घरों से निकलने वाला गंदा पानी जगह-जगह भरा हुआ है। जल निगम की टंकी, रपटा पुल, सामुदायिक भवन आदि कार्य लंबे समय से प्रस्तावित हैं, जिनके पूर्ण होने की उम्मीद भी कम ही दिख रही है।