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जर्जर छतों के नीचे पढ़ रहे 17 हजार मासूम

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ज्ञानपुर। जिले के 15 फीसदी से अधिक प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं, वह काफी चौंकाने वाले हैं। सर्वे में 179 विद्यालयों के भवन जर्जर पाए गए हैं। विभाग ऐसे भवनों में जो निष्प्रयोज्य हो चुके हैं, उन्हें चिह्नित कर रहा है। एक कक्षीय एवं द्विकक्षीय भवनों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इन खस्ताहाल भवनों में 17 हजार से ज्यादा मासूम रोज पढ़ते है। शुरूआती शिक्षा की स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है लेकिन धरातल पर कुछ को छोड़कर ज्यादातर स्कूलों में कमोबेश एक जैसी ही स्थिति है। मानक के अनुसार भवनों का निर्माण न होने पर वे अल्प समय में जर्जर हो जा रहे हैं। जिले में जूनियर और प्राइमरी के कुल 1113 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें से 25 फीसदी एक दशक पुराने हैं। इनकी छतें, दीवारें, फर्श, खिड़की, दरवाजे कुछ अस्त-व्यस्त हो गए हैं। 75 फीसदी भवन सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2005 से 2013 तक बनवाए गए। मानक के अनुरूप निर्माण न होने के कारण इन स्कूलों के भवन इतने कम समय में जर्जर होने लगे हैं। पिछले दिनों लगातार दो हफ्ते तक हुई बारिश के बाद बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से जर्जर भवनों की रिपोर्ट मांगी थी। प्रत्येक ब्लॉक में सर्वे के दौरान 179 स्कूलों के भवन जर्जर पाए गए। इनमें 95 फीसदी एककक्षीय और द्विकक्षीय भवन हैं। बारिश के दौरान इन भवनों की छतों से पानी टपकता है और दरकी हुई दीवारों से सीमेंट की छपाई झड़ती है। इसकी बानगी डीघ के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिछियां में देखी जा सकती है। इसी तरह औराई, चौरी का लठियां, सुरियावां, अभोली और भदोही के कई विद्यालयों बारिश के मौसम में कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो जाता है। विद्यार्थी ही नहीं, शिक्षक भी इस आशंका से परेशान रहते हैं कि कहीं भवन ढह गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। इस बारे में बीएसएस अमित कुमार ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से कराए गए सर्वे में 179 विद्यालयों के भवन जर्जर मिले हैं। बारिश में छतों से पानी टपकने की शिकायत है। इन भवनों में कितने निष्प्रयोज्य हो चुके हैं, उनकी सूची तैयार कराई जा है। जिले में 20 से अधिक भवन पहले से निष्प्रयोज्य हैं, जहां कक्षाओं का संचालन बंद करा दिया गया है। -
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