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चांदपुर से चलेंगी इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली की बसें

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वाराणसी। इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली से बनारस आने-जाने वाली निजी, सरकारी और अनुबंधित बसों का अड्डा गुरुवार से चांदपुर चौराहा होगा। नो इंट्री के दौरान यदि कोई बस शहर में दिखाई देगी तो उसके चालक के खिलाफ पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। चांदपुर चौराहे से कैंट या फिर शहर के किसी अन्य स्थान पर यात्री ऑटो से आएंगे-जाएंगे।
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15 मई को निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम कैंट माल गोदाम के पास सड़क पर गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। तब से अब तक कैंट तिराहे और इंग्लिशिया लाइन तिराहे से लहरतारा चौराहे के बीच भारी वाहनों का आवागमन ठप है। इस वजह से कैंट स्थित बस अड्डे से बसें सिगरा, रथयात्रा और मंडुवाडीह चौराहा से होते हुए इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली की ओर आती-जाती हैं। नतीजतन फातमान रोड, सिगरा, रथयात्रा, महमूरगंज और मंडुवाडीह में रोजाना भीषण जाम लगता है। एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत ने बुधवार को बताया कि रोजाना शहर में लग रहे जाम के कारण यह निर्णय लिया गया है कि इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली आने-जाने वाली बसें अगले निर्देश तक चांदपुर चौराहा से ही संचालित होंगी। जिन भी बसों को शहर के अंदर आना है वो चांदपुर चौराहा, लोहता, जंसा, कपसेठी, बाबतपुर, हरहुआ, तरना होकर आ सकती हैं।
रोडवेज की बसों के रोजाना 350 फेरे
इलाहाबाद, मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली के लिए रोडवेज की बसें रोजाना लगभग 350 फेरे लगाती हैं। चांदपुर चौराहे से इन जिलों के लिए रोडवेज बसों के संचालन के प्रशासन के आदेश के बाद रोडवेज प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ गई हैं। सबसे अधिक दिक्कत चौराहे के आसपास बसों के खड़े होने के लिए समुचित जगह न होने की है। दूसरे निजी बसों और छोटे सवारी वाहनों की भीड़ उनकी मुश्किलें और बढ़ाएगी। बसों के समयबद्ध संचालन में तो दिक्कतें आएंगी ही, यात्रियों को भी चांदपुर से शहर तक ऑटो या फिर दूसरे छोटे सवारी वाहनों से जाना पड़ेगा। ऐसी ही दिक्कत शहर की तरफ से इन जिलों को रवाना होने वाले यात्रियों को उठानी होगी। उन्हें पहले कैंट से चांदपुर तक ऑटो से आना होगा और फिर यहां से बसें पकड़नी होंगी।
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समय भी बढ़ जाएगा और किराया भी
क्षेत्रीय प्रबंधक कपिल शर्मा ने बताया कि शहर में ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए प्रशासन ने इन जिलों की बसों को चांदपुर चौराहे से संचालित करने का निर्देश रोडवेज को दिया है। रोडवेज प्रबंधन दूसरे डिपो से बनारस आने-जाने वाली बसों को तो चांदपुर से ही वापस कर देगा लेकिन जो बसें वाराणसी डिपो की हैं, उन्हें ईंधन के लिए कैंट रोडवेज तक लोहता, जंसा, कपसेठी, बाबतपुर होते हुए ले आना जाएगा। ऐसी स्थिति में बाबतपुर-जंसा रूट की अतिरिक्त दूरी तय करने में तकरीबन एक से डेढ़ घंटे का अतिरिक्त समय जाया होगा, साथ ही किराया भी बढ़ जाएगा। रोडवेज प्रबंधन ने हालांकि अभी कोई तैयारी नहीं की है। क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि गुरुवार से प्रशासन के निर्देशानुसार नई व्यवस्था लागू होगी। दो-तीन ट्रायल के तौर पर व्यवस्था संचालित की जाएगी और फिर जो भी संभव हो सकेगा, यात्रियों की सहूलियत के लिए किया जाएगा। जरूरत हुई तो चांदपुर चौराहे पर एक निरीक्षक और कुछ अन्य स्टाफ की तैनाती कर अस्थाई कार्यालय खोलने पर भी विचार किया जा सकता है। यहां बसों के खड़े होने के लिए जगह समुचित उपलब्ध न होने के बारे में उनका कहना था कि कोशिश की जाएगी कि एक समय में चार-पांच बसें ही यहां खड़ी हों। बाकी बसें आती-जाती रहेंगी।
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