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सदानीरा का जल बन रहा जहर

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ज्ञानपुर। गंदगी और कचरे को रोकने के ठोस उपाय न होने के कारण जिले से गुजरी मोक्षदायिनी गंगा जहरीली होती जा रही है। कालीन कारखानों का रासायनिक पानी, कस्बों का सीवेज, अस्पतालों का अपशिष्ट वरुणा और मोरवा नदी के जरिये गंगा में पहुंच रहा है। यही नहीं, मानव और जनवरों के शव भी गंगा में फेंके जा रहे हैं। यही वजह है कि आर्सेनिक, फ्लोराइड एवं क्रोमियम जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा गंगा में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। हालत यह हो गई है कि गंगा का जल आचमन के लायक भी नहीं रहा।
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जिले में गंगा, वरुणा और मोरवा तीन नदियां हैं। मोरवा और वरुणा तो साल भर में छह से सात माह तक सूखी रहती हैं। बारिश और ठंड के समय ही इसमें पानी दिखता है। बाकी दिनों में भदोही और खमरिया स्थित कालीन कारखानों का जहरीला पानी और कस्बों का सीवेज ही इन नदियों में बजबजाता है, जो गंगा में जाकर गिरता है। भदोही के कारखानों से प्रतिदिन 11.5 एमएलडी दूषित पानी निकलता है, जो सीधे मोरवा नदी में जाता है। पिछले दिनों यहां आई एनजीटी की टीम ने दूषित पानी के शोधन की कोई व्यवस्था न होने पर नाराजगी जताई थी। इसको गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका प्रशासन ने यहां एसटीपी बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसके अलावा गोपीगंज, औराई और घोषिया समेत अन्य कस्बों का सीवेज भी गंगा में जाता है। साथ ही प्रतिदिन 40 से 50 मानव के शव, निर्माल्य और अन्य प्रकार का कचरा फेंका जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. एससी शुक्ला ने कहा कि गंगा के जल में आर्सेनिक, फ्लोराइड एवं क्रोमियम जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा दिनोदिन बढ़ती जा रही है। कहा कि गंदे नालों का पानी, औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा, सीवेज, घरेलू कचरा रोकने के ठोस उपाय न किए गए तो हालात बहुत ज्यादा बिगड़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन को सख्ती बढ़ाने के साथ जरूरी उपाय करना होगा। साथ ही जागरूकता अभियानों में तेजी लानी होगी। कई स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा औद्योगिक अपशिष्टों को साफ करने के लिये संयंत्रों को लगाए गए हैं लेकिन खराब होने से काम नहीं कर रहे हैं।
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