वाराणसी। मनुष्य में भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार सोचने समझने की क्षमता तथा समस्या के प्रति उसके नजरिये में बदलाव आता है। उक्त बातें गुरूवार को डीएवी पीजी कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के संयोजन में आयोजित ‘मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं व्यक्ति संवर्धन’ विषयक पर दस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने कही। उन्होंने कहा कि यदि हम सामान्य वातावरण में अपनी मानसिक स्थिति को जिस रूप में देखते है वहीं यदि कठिन वातावरण में रहे तो मानव की मानसिक स्थिति में भी बदलाव आ जाता है। हमारे काम करने का ढंग भी बदल जाता है। मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का उपयोग करते समय इन सभी तथ्यों को दृष्टिगत रखना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रो. एपी सिंह ने कहा कि विदेशी परीक्षणों का हूबहू उपयोग करना हमारे हित में नही है बल्कि उसका भारतीय सांस्कृतिक परिवेश में अनुकूलन आवश्यक है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि बिना मनोवैज्ञानिक परीक्षण के उपयोग के व्यक्ति की कमियों और क्षमताओं का आकलन नही किया जा सकता है। कार्यशाला के मुख्य वक्ता एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश पांडेय ने कहा कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण के प्रशासन के समय परीक्षण कर्ता के द्वारा किए जाने वाली त्रुटियों को दृष्टिगत रखना अति आवश्यक है।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला का आयोजन अत्यंत आवश्यक है जिससे की बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चे भी समाज की मुख्य धारा का हिस्सा बन सकते है। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्रार्चाय डॉ. सत्यदेव सिंह के निर्देशन, स्वागत भाषण एवं विषय स्थापना विभागाध्यक्ष तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. सत्यगोपाल और डॉ. ऋचारानी यादव व कमालुद्दीन शेख ने किया। संचालन डॉ. कल्पना सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अखिलेंद्र कुमार सिंह ने दिया। इस अवसर पर डॉ. पीके सेन, डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डॉ. विनोद कुमार चैधरी, डॉ. मिश्रीलाल, डॉ. शैलजा सिंह, डॉ. हसन बानो, डॉ. नेहा चैधरी, डॉ. स्वाती सुचरिता नंदा, डॉ. प्रियंका सिंह आदि अध्यापकों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।