फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘मानस मसान’ के पंडाल पर मना श्रीराम का जन्मोत्सव

विज्ञापन
विज्ञापन
‘वाराणसी। गंगा उस पार डोमरी में चली रामकथा ‘मानस मसान’ में पांचवें दिन बुधवार को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौशिल्या हितकारी। हर्षित महतारी मुनि मन हारी, अद्भुत रूप विचारी... गाते हुए जब संत मोरारी बापू ने प्रभु राम के जन्म का बखान किया तो श्रद्धालु आह्लादित हो गए। पंडाल में टाफियां बांटी जाने लगीं और बधाई गीत गूंजने लगे। तमाम भक्त हाथ उठा कर नृत्य करने लगे।
विज्ञापन

संतकृपा सनातन संस्थान की ओर से डोमरी स्थित सतुआ बाबा की गोशाला परिसर में आयोजित राम कथा में संत मोरारी बापू ने कहा कि उज्जैनी और काशी परंपरा में मसान सिद्ध पीठ और यजमान है। व्यास पीठ पर बोलना चिता पर बैठकर बोलने के समान है। मृत्यु वाले घर में उत्तरकांड का और मसान में सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो सभी क्रियाएं पूरी होती हैं। संत ने कहा कि आजकल कर्मयोग कम हो गया है और कर्मकांड बढ़ गया है। पुरुषार्थ को पूरा करने के बाद प्रार्थना और प्रतीक्षा करने से प्रभु मिलते हैं। उन्होंने भगवान के भजन पर जोर दिया। कहा कि भजन निडरता का परिचायक है। डरपोक आदमी भजन नहीं कर सकता है। इसलिए हमेशा प्रभु के भजन करो और हर तरह से भय से मुक्त।
कमजोर ही सहारा तलाशते हैं
बापू ने कहा कि ज्यादा जवाब वो देता है जो झूठा हो सकता है। सत्य को किसी समर्थन और सहारे की जरूरत नहीं होती। सहारे की जरूरत कमजोर को होती है। इसीलिए अंध श्रद्धा और झूठी मान्यता के लिए स्वच्छता अभियान की जरूरत है।
विज्ञापन

मुख से निकले वचन वापस नहीं आते
किसी को कभी श्राप मत दो बल्कि उसे सावधान करो। श्राप देने जैसा तप हमारे अंदर है ही नहीं। इसके लिए तपस्या चाहिए। इसलिए सोच-समझ कर बोलना चाहिए, क्योंकि मुख से निकले वचन कभी वापस नहीं आते। वे हमेशा ब्रह्मांड में घूमते रहते हैं।
महाभारत के कलाकारों ने किया चक्रव्यूह का मंचन
वाराणसी। रामकथा मानस मसान के पंडाल में बुधवार की शाम चक्रव्यूह नाटक का मंचन हुआ। महाभारत के कलाकारों का भावपूर्ण अभिनय देख महाभारत सीरियल की यादें ताजा हो गईं। इसमें सिने अभिनेता पुनीत इस्सर ने दुर्योधन और नीतीश भारद्वाज ने कृष्ण की भूमिका अदा की। चक्रव्यूह महाभारत के दसवें दिन की कहानी है। अभिमन्यू कौरवों के चक्रव्यूह में घिर जाता है और युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त होता है। दो घंटे के नाटक में यह बताने का प्रयास किया गया कि हम सभी अभिमन्यु हैं और जीवन के चक्रव्यूह में घिरे रहते हैं। जो इस चक्रव्यूह से बाहर आ जाता है, वह मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। कोकोनट थियेटर और फिल्म एवं थियेटर सोसाइटी की यह प्रस्तुति रही। नाटक का लेखन और निर्देशन अतुल सत्य कौशिक ने किया है। अभिमन्यु का किरदार साहिल छाबड़ा, युधिष्ठिर की भूमिका में गौरव जाखू और द्रोपदी की भूमिका निष्ठा पालीवाल ने निभाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें