वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा आयोजित कालीन मेले में मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए एक से बढ़कर एक भव्य स्टाल बनाए गए हैं। मेले में इस तरह के प्रयोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे विदेशी आयातक इन स्टॉलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
स्टॉलों में कालीन बनाने संबंधी उपकरणों, धागों आदि को प्रदर्शित करने के साथ कालीन में हस्तशिल्पियों की जीवनशैली का भी चित्रण देखने को मिल रहा है। 274 स्टॉलों और सात हजार वर्ग मीटर क्षेत्र ने आयातकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रयोग किए हैं। आरएमसी के निर्यातक अब्दुल रब का कहना है कि मेले में स्थान और स्टॉल की बनावट और उसमें उत्पाद का डिस्प्ले सफलता का पैमाना तय करती है। भदोही के निर्यातक जावेद रग्स ने अपने स्टाल को अंतरराष्ट्रीय थ्रीडी डिजाइन का प्रयोग करते हुए उसे आकर्षक बनाया है। वहीं ग्लोबल ओवरसीज के निर्यातक संजय गुप्ता ने कहा कि मेले में स्टॉल के माध्यम से अगले छह महीने के लिए निर्यात ऑर्डर बुक करने का प्रयास होता है।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के प्रथम उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि पहला मेला सिर्फ 250 वर्ग मीटर के साथ शुरू किया गया था। उस दौरान काफी साधारण स्टाल बनाए जाते थे और कुछ निर्यातक ही उसमें शिरकत करते थे लेकिन आज यह मेला विश्व स्तर पर एक ब्रांड बन चुका है।
तीन दिनों में छह सौ आयातकों ने की शिरकत
कारपेट एक्सपो में तीन दिन में करीब लगभग छह सौ आयातकों व उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके बारे में जानकारी देते हुए परिषद के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने बताया कि तीन दिनों में 275 आयातक व आयातकों के 304 प्रतिनिधियों ने मेले में अपनी भागीदारी दिखाई। कई प्रमुख देशों के बड़े आयातक भी मेले में पहुंचे और निर्यातकों के साथ व्यापारिक अनुबंध किया ।