वाराणसी। इस बार भी बारिश में उफनाते नालों और जलभराव से शहरियों को निजात नहीं मिलने वाली। वजह, मानसून की दस्तक हो चुकी है। पूर्वांचल के कई इलाकों में बारिश भी शुरू हो चुकी है। इधर, नगर निगम अब तक नाले-नालियों की सफाई का काम पूरा नहीं करा सका है। जलनिकासी की भी समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते हल्की बारिश में भी कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। स्मार्ट और स्वच्छ शहर की सूची में शामिल काशी में यह मंजर इस बार भी दिखेगा।
बरसाती पानी की निकासी के लिए जल निगम ने 80 किमी से अधिक लंबी पाइपलाइन का जाल पूरे शहर में बिछा रखा है। मगर बारिश होते ही कई चौराहे और कॉलोनियां जलमग्न हो जाते हैं। लोगाें का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। निगम ने जलभराव वाले ऐसे 29 स्थान चिह्नित किए हैं। हालांकि नालों की सफाई का काम पूरा न होने से गंदा पानी उफनाएगा और घरों में घुसेगा।
नगर निगम भले ही कागजी दावा कर ले कि नालों की सफाई का काम लगभग पूरा कर लिया गया है मगर हकीकत आंखों के सामने है। जहां सिल्ट निकाली भी गई, सड़क पर ही छोड़ दी गई। अब बारिश में ये फिर नालों में चली जाएगी। सोमवार की आधी रात को आई तेज आंधी और बारिश में शहर के कई इलाकों में सड़काें और गलियों के किनारे निकाली गई सिल्ट फिर नाले में जमा हो गई। इस बाबत मुख्य अभियंता कैलाश सिंह का कहना है कि करीब 40 किमी लंबे नालों की सफाई का टेंडर कराया गया था। इसमें लगभग काम पूरा करा लिया गया है।