प्रो. शिंदे का मानना है कि समुद्री विरासत में सिर्फ समुद्र ही नहीं बल्कि नदियों के किनारे बसे प्राचीन शहरों को भी शामिल किया गया है। वस्तुओं को ले जाने के लिए जल्द ही बीएचयू के साथ समझोता किया जाएगा। इसके तहत बीएचयू और बनारस को पूरे भारत के इतिहास से जोड़ा जाएगा। बीएचयू के प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग के म्यूजियम में ये सभी पुरातात्विक वस्तुएं रखी गई हैं।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से 400 एकड़ जमीन पर लोथल संग्रहालय बनाया जा रहा है। प्रो. शिंदे ने कहा कि इस म्यूजियम में गुजरात से लेकर बंगाल तक के इतिहास को एक जगह दिखाना है। काशी का 4000 साल और हड़प्पा का 5000 साल पुराना इतिहास दिखाना है।
रोम से 2000 साल पहले भारत ने बनाया पोतगाह: प्रो. शिंदे ने बताया कि दुनिया का सबसे पहला पोतगाह जहाज बनाने का यार्ड भारत में ही बना था। रोम से 2000 साल पहले हड़प्पा काल के लोगों को ये कला आती थी। रोमन ने खुद ही हमसे जहाज बनाना सीखा था।