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फिल्म में रिटेक हो सकता है, रंगमंच में नहीं

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वाराणसी। फिल्मों के आने के बाद रंगमच थोड़ा पिछड़ गया था लेकिन अब रंगमंच ने फिर अपनी जगह बना ली है। यह बातें फिल्म और रंगमंच कलाकार गोविंद नामदेव ने मंगलवार को कबीरचौरा स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में कही। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्म में रिटेक की संभावना होती है लेकिन रंगमंच में आपको मंच पर सीधे दर्शकों से रूबरू होते हुए अपनी कला को प्रदर्शित करना पड़ता है। उसमें कोई रिटेक नहीं किया जा सकता है। इसलिए रंगमंच में चुनौती और संघर्ष ज्यादा है।
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गोविंद नामदेव खुद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्र रहे हैं और इनका बचपन बहुत ही मुफलिसी में बीता है। इसके बीच वे रंगमच की कला को सीखा और पढ़ने के बाद 70 के दशक में विदेश में रहे। इसके बाद वे दर्जनों फिल्मों और धारावाहिकों में काम किए।
एनएसडी के छात्रों को दिए टिप्स
गोविंद नामदेव ने एनएसडी छात्रों को कला के प्रदर्शन का पाठ पढ़ाया। कहा कि हाव-भाव और स्वभाव में जब तक रंगमंच नहीं उतरेगा, तब तक मंच पर कला का रंग नहीं निखरेगा। इसलिए सभी लोग अभिनय के अनुसार कला को प्रदर्शित करें। उन्होंने समय-समय पर यहां आते रहने की बात कही। इस मौके पर एनएसडी के 20 छात्र-छात्राएं और वाराणसी शाखा के निदेशक रामजी बाली उपस्थित रहे।
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