वाराणसी। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों की हड़ताल को अवैध घोषित करने के बाद शुक्रवार को कार्यालय खुले और कर्मचारी भी काम पर लौट आए। हालांकि प्रशासन की ओर से प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों पर नजर रखी जा रही है।
पुरानी पेंशन बहाली के लिए राज्य कर्मचारियों ने छह फरवरी से हड़ताल शुरू की थी। एक सप्ताह की हड़ताल पर गए राज्य कर्मचारियों ने दो दिन तक कार्य बहिष्कार कर बैठकें कीं और धरना दिया। बृहस्पतिवार को हड़ताल अवैध घोषित होने के बाद प्रशासन की ओर से कर्मचारियों को नोटिस जारी कर दिया गया। पुरानी पेंशन बहाली मंच के जिला संयोजक शशिकांत श्रीवास्तव ने बताया कि विशेष सचिव कार्मिक के पत्र में न्यायालय के आदेश की जानकारी दी गई थी। इसके बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई।
पुरानी पेंशन बहाली के लिए हड़ताल अवैध घोषित किए जाने पर शिक्षक संघ कानूनी लड़ाई के लिए कमर कस रहा है। उत्तर प्रदेशीय माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सनत कुमार सिंह ने बताया कि हम लोग इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा इस मामले में कानूनी सलाह ले रहे हैं। वकीलों की राय मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली मंच के गठन के दौरान ही हमने धरने की सूचना दे दी थी, बावजूद इसके सरकार ने हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्यों को जब पेंशन दी जा रही है तो कर्मचारियों, शिक्षकों एवं अधिकारियों को पेंशन देने पर सरकार को क्यों आपत्ति है।