वाराणसी। पल्स पोलियो की तरह टीबी को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से अब घर-घर अभियान चलाकर टीबी के मरीजों की खोज की जाएगी। 21 जनवरी से एक फरवरी तक चलने वाले अभियान के तहत स्क्रीनिंग के बाद मिलने वाले टीबी मरीजों का सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज, जांच की सुविधा भी मिलेगी। शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में आयोजित प्रेसकांफ्रेंस में अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. बीएन सिंह, सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान टीबी के कारण, बचाव के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।
जिले में चलने वाले टीबी सक्रिय खोज अभियान के बारे में अधिकारियों ने बताया कि अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर सभी की स्क्रीनिंग करेगी। अगर समय से टीबी मरीजों के बारे में जानकारी मिले और इलाज शुरू हो तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा ब्लॉक स्तर पर डॉटस केंद्र भी बनाए गए हैं। बताया कि पॉजिटिव पाए जाने पर मरीजों की सी.बी. नाट जांच कराने के साथ ही फालोअप भी कराया जाएगा। टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य 2025 तक रखा गया है जबकि जिले में 2022 तक टीबी मुक्ति का लक्ष्य रखा गया है। जिला क्षयरोग अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि अभियान के लिए 150 टीमें गठित की गई हैं।
अब तक चले हैं पांच चरण
जिले में अब तक पांच चरण चलाए जा चुके हैं। इसमें कुल 285 टीबी के मरीज खोजे गए। अगस्त 2017 में पहले चरण में 1613 लोगों के बलगम की जांच में 43 टीबी के मरीज मिले। दिसंबर 2017 में दूसरे चरण में 2029 के बलगम की जांच में 52 में पुष्टि हुई जबकि फरवरी 2018 में चले तीसरे चरण में जिन 2933 लोगों की जांच हुई उसमें 72 टीबी मरीज मिले। इसके अलावा जून 2018 में चिह्नित 1497 में 43 टीबी के मरीज मिले और सितंबर 2018 में 1718 लोगों की जांच हुई और इस चरण में 75 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई।