वाराणसी। एक जादुई किस्से जैसी है काशी, जो सदियों से लोगों को मंत्रमुग्ध किए हुए है और इस किस्से के अहम किरदार हैं, यहां के विविध रंगों, चरित्र वाले कलात्मक, साहित्यिक, धार्मिक उत्सव। ये उत्सव अपने सशक्त अभिनय से सदियों से हमें बांधे हुए हैं। इन उत्सवों में कोई बाबा विश्वनाथ से अबीर गुलाल खेलता है तो कोई गंगा तीर रामनगर में श्रीराम के आदर्श चरित्र को जीता है। ये किरदार काशी की अमानत है, कहीं और नहीं मिलेेंगे। दर्शकों की कई पीढ़ियां इनके अभिनय की साक्षी बन चुकी हैं। अब इन्हीं किरदारों को संजो कर एक साझा किस्सागोई की शुरुआत होने जा रही है।
काशी की विरासत से जुड़े यहां के पांच उत्सवों को डॉक्यूमेंट्री में पिरोया जा रहा है ताकि इस विरासत को न सिर्फ वैश्विक स्तर पर लाया जा सके और दूर देश में बैठे लोगों का इनसे साक्षात्कार कराया जा सके। ये पहल की है ‘इनोवेशन मोटिव’ संस्था ने। रामनगर की रामलीला, चेतगंज की नक्कटैया, नाटी इमली का भरत मिलाप, तुलसीघाट का नागनथैया और बाबा की रंगभरी एकादशी की पांच से दस मिनट की डॉक्यूमेंट्री तैयार की जा रही है। इन पांचों उत्सवों को इन डॉक्यूमेंट्री के जरिये एक धागे में पिरोने की तैयारी शुरू हो गई है। इस डॉक्यूमेंट्री में काशी की पहचान ये पांचों उत्सव अपना तिलिस्मी अभिनय बिखेरेंगे।
इनोवेशन मोटिव के सीईओ आलोक दीप बताते हैं कि रंगभरी एकादशी पर उन्होंने छह मिनट की डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। इसे सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचाया गया। इसका असर ये हुआ कि देश दुनिया से करीब 15,000 से अधिक लोगों ने लाइक और शेयर किया। कई विदेशी तो रंगभरी एकादशी देखने भी पहुंचे थे। ऐसे ही काशी की थाती माने जाने वाले अन्य धार्मिक उत्सवों पर भी डॉक्यूमेंट्री तैयार करने की योजना है। इन्हें यू-ट्यूब के जरिये भी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास होगा।