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गंगा का हाल, घाट पड़ताल

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वाराणसी। जैसे जैसे हम अस्सी घाट की ओर से बढ़ रहे हैं गंगा में गंदगी और सीवेज की समस्या विकराल होती जा रही है। शीतलाघाट से अहिल्याबाई घाट, मुंशी घाट, राणामहल घाट, चौसठ्ठी देवी घाट और चौकी घाट की स्थितियां बेहतर नहीं हैं। पेशवा साम्राज्य और पौराणिक मान्यताओं को समेटे हुए घाटों से होकर गंदगी सीधे गंगा में ही जा रही है। आदिकेशव और अस्सी घाट के बीच में पड़ने वाले कुछ घाटों को छोड़ दें तो बाकी घाटों पर गंगा की हालत ठीक नहीं है।
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शीतला घाट से जैसे ही हम अहिल्याबाई घाट होते हुए दिग्पतिया घाट, पांडेय घाट, चौकी घाट होते हुए मानसरोवर घाट पहुंचे तो सफाई की हकीकत सामने आ गई। घाटों पर जगह-जगह गंदगी बिखरी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां जब वीआईपी के आने का समय होता है तभी सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाता है। जगह-जगह घाट की सीढ़ियां टूटने के कारण पर्यटकों को परेशानी होती है। गंगा के जल में बोल्डर, शीशा, कंकड़ होने के कारण नहाने वालों को आए दिन चोट लगती है। जलस्तर में कमी आने के कारण घाट किनारे की सीढ़ियां भी नजर आने लगी हैं। डिजाल्व आक्सीजन की मात्रा खतरनाक स्तर तक कम होने के कारण इन घाटों पर जलचरों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है। घाट पर रहने वाले सर्वेश्वर प्रसाद मांझी का कहना है कि 22 साल से अधिक समय से गंगा में नाव चला रहा हूं लेकिन गंगा की जो दुर्दशा वर्तमान में है वह बेहद चिंताजनक है। घाट पर अब मछलियां भी बहुत कम नजर आती हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालु तो किसी तरह गंगा में डुबकी लगा लेते हैं लेकिन स्थानीय लोगों ने तो अब गंगा स्नान करना ही छोड़ दिया है। गंगा में डुबकी लगाने के दौरान जल से बदबू आ रही है।
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