वाराणसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व चेयरमैन पद्मभूषण डॉ. के राधाकृष्णन ने छात्र-युवाओं को जीवन में सफलता हासिल करने की राह बताई। इस राह की चुनौतियों, मुश्किलों को भी साझा किया। संघर्ष का हौसला भरा और लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा दी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्यअतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि अब वो वक्त आ गया है जब आपके सामने कठिन परिस्थितियां आएंगी और आपको साहसी फैसले लेने पड़ेंगे। असफलताएं भी सामने आएंगी लेकिन उससे हताश-निराश होने की नहीं बल्कि सीखने की जरूरत है। डॉ. राधाकृष्णन ने इस दौरान मंगलयान की चुनौतियों और उसकी सफलता की कहानी भी साझा की। इसके जरिए यह समझाया कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी कैसे अपने मिशन, अपने लक्ष्य को कामयाब बनाया जा सकता है।
डॉ. राधाकृष्णन के नेतृत्व में ही मंगलयान का सफल प्रक्षेपण कर भारत ने पूरी दुनिया में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। दीक्षांत में डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि मंगलयान से हमें और आपको प्रेरणा लेने की जरूरत है। हमें सिर्फ अपना लक्ष्य याद रखना चाहिए। जुनून, समर्पण और निष्ठा के साथ कठिन परिस्थितियों में साहसिक निर्णय लेने चाहिए। जब बात राष्ट्रीय गरिमा की हो तब यह और जरूरी हो जाता है। जैसा कि हमने मंगलयान के प्रक्षेपण के दौरान किया। हमने सीमित संसाधनों और क्षमताओं के बीच अभिनव प्रयोग किए। आलोचनाओं को सकारात्मक रूप में लिया और 24 सितंबर 2014 को भारत ने अपनी पहली ही कोशिश में इतिहास रच दिया। आज अमेरिका, रूस, जापान और चीन के बाद आधुनिक अंतरिक्ष युग में भारत का नाम है। अंतरिक्ष अनुप्रयोग में भारत एक रोल मॉडल के रूप में वैश्विक स्तर पर पहचाना जा रहा है। रॉकेट साइंस अब मुहावरे की चीज नहीं रह गई। अब रॉकेट साइंस में भी हम आगे हैं। छात्र-युवाओं का आह्वान किया कि आप भी अभिनव प्रयोग करें। आज प्रौद्योगिकी ने शिक्षा को समय और स्थान के बंधन से मुक्त कर दिया है। प्रौद्योगिकी बहुत तेजी से प्रगति कर रही है लेकिन हमें विघटनकारी तकनीक से सतर्क रहना होगा।