विकलांगों को सर्किट हाउस की दूसरी मंजिल तक की सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं।
जन्म से गूंगे और बहरे बच्चों को सामान्य बनाने और मुख्य धारा में लाने के लिए 278 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए धन आवंटित कर दिया है। केंद्र सरकार इस दिशा में तेजी से प्रयास कर रही है। हर साल ऐसे पांच सौ बच्चों का काक्लियर प्लांट करने का लक्ष्य रखा गया है। ये बातें मुख्य आयुक्त (नि:शक्तजन) डॉ. कमलेश कुमार पांडेय ने रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
बताया कि एक इंप्लाट करने पर छह लाख रुपये लग जाते हैं। यह खर्च सरकार उठाएगी। उन्होंने कहा कि 1999 से अब तक दिव्यांगों से जुड़े देशभर से 27 हजार मामले लंबित थे, जिनमें से करीब 26 हजार का निस्तारण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उनके यहां कोई भी दिव्यांग बिना किसी अधिवक्ता के अपनी शिकायत या अपील कर सकता है। ऑनलाइन भी अपील दाखिल की जा सकती है। आवास, आरक्षण और पेंशन संबंधी करीब ढाई सौ शिकायतें हर महीने आती हैं। सुगम्य भारत के तहत देश के 100 शहरों में 50-50 भवनों को सुगम्य बनाया जाएगा।