वाराणसी/प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने उनको जमानत के दौरान शर्तों का पालन करने निर्देश दिया है। जवाहर पर 2012 में वाराणसी के कैंट थाने में हत्या और षड्यंत्र की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि उसने संत प्रसाद जायसवाल की हत्या की साजिश रची, मगर शूटरों ने गलत पहचान के कारण संत प्रसाद के भाई महेश की हत्या कर दी।
जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति आरके गौतम ने सुनवाई की। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी और अधिवक्ता अजात शत्रु पांडेय ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना था कि याची के खिलाफ 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें उसे जमानत मिल चुकी है। इसके बावजूद सत्र न्यायालय ने जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। याची 12 जनवरी 2019 से जेल में बंद है। कहा गया कि याची पूर्व सांसद और व्यापारी है, उसकी तमाम लोगों से शत्रुता है। इसी वजह से उसे फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया। पुलिस ने वादी मुकदमा संत प्रसाद जायसवाल का बयान दर्ज करने में नौ माह का समय लगाया। याची का कहना था कि वह बीमार है और विवेचना में पूरा सहयोग करने को तैयार है। कोर्ट ने जमानत का आधार पाते हुए अर्जी मंजूर कर ली है।