वाराणसी। शहर में गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल संकट गहराने लगा है। जलकल की पाइपलाइनों में लीकेज की वजह से पानी नहीं मिल रहा है और अगर पानी आ भी रहा है तो दूषित। रही सही कसर खराब हैंडपंपों ने पूरी कर दी है। हालात ये है कि शहर में लगे 70 फीसदी से ज्यादा हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर कराने के लिए जलनिगम के अफसर लापरवाह बने हुए हैं।
शहर के नागरिक दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए उत्तर प्रदेश जलनिगम ने शहर में करीब ढाई हजार हैंडपंप लगवाए हैं। स्थिति यह है कि तमाम मोहल्लों और मुख्य मार्गों पर लोग इंडिया मार्का हैंडपंप के ही सहारे रहते हैं। दरअसल, जलनिगम अपने स्तर से सर्वे कराकर खराब हैंडपंपों को चिह्नित करता है। इसके बाद हैंडपंपों के मेंटेनेंस और रीबोर के लिए कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी जाती है। शासन से बजट जारी होने के बाद हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर कराने का काम शुरू किया जाता है। यूं तो जलनिगम शहर में महज 25 से 30 फीसदी हैंडपंपों के खराब होने का दावा करता है, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। वस्तुस्थिति यह है कि शहर में 70 फीसदी से ज्यादा हैंडपंप खराब पड़े हैं। जो सही हालत में हैं भी उनमें से अधिसंख्य में गंदा पानी आ रहा है।
हैंडपंप व नलकूप (ट्यूबवेल) लगाने और उसका मेंटेनेंस व रीबोर कराने की जिम्मेदारी शहर में जलनिगम (नलकूप डिवीजन) और गांवों में ग्राम पंचायतों के जिम्मे है। अधिकारियों की मानें तो शहर में हैंडपंप और नलकूप लगाने के बाद साल भर तक उसका मेंटेनेंस जलनिगम करवाता है। उसके बाद यह जिम्मेदारी जलकल को सौंप दी जाती है। इस बीच, जरूरत पड़ने पर जलनिगम भी अपने मेंटेनेंस मद से मरम्मत करवाता है।