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विरासत के लिए उतरे सड़क पर

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वाराणसी। घंटा, घड़ियाल डमरू की थाप व मुंह पर काली पट्टी बांधकर धरोहर बचाओ संघर्ष समिति के लोग रविवार को सड़क पर उतर आए। नीलकंठ महादेव से लेकर सरस्वती फाटक तक उन्होंने शांति मार्च निकालकर गंगा पाथवे का विरोध जताया। समिति के सदस्यों ने जिंदगी से दूर होंगे विश्वनाथ से नहीं, जान देंगे घर नहीं...के स्लोगन लिखी तख्तियां हाथ में लेकर शासन और प्रशासन से गंगा पाथवे पर रोक लगाने की मांग की।
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रविवार को शांति मार्च नीलकण्ठ मन्दिर से निकलकर कचौड़ी गली, चौक, ज्ञानवापी, बांसफाटक, गौदोलिया, चितरंजन पार्क होते हुए सरस्वती फाटक पर जाकर समाप्त हुई। इसके पूर्व नीलकंठ महादेव मंदिर के प्रांगण में क्षेत्र के पीड़ित निवासियों की एक बैठक हुई। जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर सुधांशु शेखर, मानस मंदिर के मुख्य अर्चक वयोवृद्ध समाजसेवी पंडित बटुकनाथ शास्त्री व वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा सहित क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवियों ने नागरिकों को सम्बोधित किया। बैठक में ही एक संकल्प पत्र पर सभी पीड़ितों ने हस्ताक्षर किये तथा सत्रह सूत्रीय एक मांगपत्र काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को देने का निर्णय किया गया। जिसकी प्रतिलिपि वाराणसी के सांसद व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, धर्मार्थ कार्य विभाग के सचिव व कमिश्नर एवं जिलाधिकारी वाराणसी व नगर के समस्त जनप्रतिनिधियों को भेजने का निश्चय किया।
महामृत्युंजय मंदिर परिवार के किशन दीक्षित ने इसे काशी के वजूद को नष्ट करने की साजिश करार दिया। वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने कहा कि प्राचीन काशी के इतिहास के साथ उसके भूगोल को जाने बगैर कोई योजना बनाने का सीधा मतलब काशी को नष्ट करना है। शांति मार्च में कन्हैया त्रिपाठी, राजनाथ तिवारी, शशिधर इस्सर, प्रोफेसर ललित कुमार भारती, दिलीप यादव, सुनील मेहरोत्रा, महालक्ष्मी शुक्ला, सुषमा चौधरी, शालिनी यादव, राजकूपर, राजू साव, विनय चौधरी, मदन यादव, सदन यादव, सोनू कपूर,जितेंद्र पाल, राजकुमार पाठक सहित क्षेत्र के हजारों की संख्याओं में महिलायें, पुरुष व नौजवान सम्मिलित रहे।
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