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छह साल से मलाई काट रहे थे वीडीए कर्मचारी

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वाराणसी। दाल मंडी में जिस अवैध निर्माण की जानकारी होने से वीडीए अफसर इंकार कर रहे हैं, वह कोई नया निर्माण नहीं है। यहां 2012 से रुक-रुक कर निर्माण किया जा रहा है। इस दौरान जानकारी होने पर केवल एक बार 2012 में वीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष ने सीलिंग की कार्रवाई की और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके मातहत अफसरों ने इसे नजरअंदाज किया। नतीजा यह हुआ कि छह साल से यहां रात में चोरी-छिपे निर्माण होता रहा। बुधवार को कार्रवाई के दौरान चर्चा यह भी थी कि अधिकारी निर्माण के बदले में धन उगाही करते हैँ और जब उच्चाधिकारियों को पता चलता है तो कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
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सूत्रों का कहना है कि बिना अनुमति निर्माण की जानकारी होने पर इस भवन को सील कर दिया गया था। 2012 में सील करने और ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भवन स्वामी ने मंडलायुक्त के यहां अपील कर दी। तब से प्रकरण मंडलायुक्त के यहां लंबित है। इस बीच वीडीए अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से छह साल से निर्माण जारी था।
दूसरी ओर चौक थाने और दशाश्वमेध जोन के दाल मंडी के अलावा हड़हा, चौक, राजा बाजार और कोदई चौकी का सघन इलाका है, जहां अवैध निर्माण अब भी चोरी-छिपे जारी है। निर्माण के एवज में मोटी रकम वसूली जाती है और अफसर से लेकर कर्मचारी तक आंखें मूंदे रहते हैं।
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उपाध्यक्ष, वीडीए राजेश कुमार ने बताया कि दाल मंडी इलाके में अवैध निर्माण की शिकायत मिलने और कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही उजागर होने पर भवन सील करने के साथ दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही तीन अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति कर दी गई है। मामले में जो भी दोषी होंगे, दंडित होंगे।
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