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जिन प्रेम किया तिनही प्रभो पायो...

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वाराणसी। साचु कहों सुन लेहु सभै, जिन प्रेम कियो तिनही प्रभो पायो, वह प्रगटयो पुरख अंगमंड़ा वरयाम अकेला, एवं जो बोले सो निहाल सतश्री अकाल...के जयकारे से सोमवार को शहर के गुरुद्वारे गूंज उठे। श्री गुरुगोविंद सिंह का 351वां प्रकाशोत्सव गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा गुरुद्वारा गुरुबाग, बड़ीसंगत, नीचीबाग में श्रद्धा एवं उत्साह से मनाया गया। हजारों की संख्या में लोगों ने पवित्र श्री गुरुग्रंथ साहिब जी को मत्था टेका। गुरुद्वारों को फूल-माला और झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
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सोमवार की भोर में गुरुद्वारा बड़ीसंगत, नीचीबाग में श्रीगुरु ग्रंथ साहिब जी का भव्य स्वागत किया गया। फूलों से सजी पालकी की परिक्रमा कर गुरु प्रेमियों ने शबद कीर्तन में भी बढ़चढ़कर भाग लिया। सिमरन एवं शबद कीर्तन के उपरांत 40 दिनों तक चलने वाली प्रभातफेरियों और अखंड पाठ साहिब जी के पाठ का समापन किया गया। अरदास के बाद सभी को प्रसाद का वितरण किया गया। गुरुद्वारा गुरुबाग में भाई बलदेव सिंह वडाला, हरदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, रकम सिंह के रागी जत्थों ने शबद कीर्तन से संगत को निहाल किया। गुरुनानक खालसा बालिका इंटर कॉलेज एवं गुरुनानक इंग्लिश स्कूल के बच्चों ने शबद गायन किया। मुख्य ग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने दीवान समाप्ति अरदास की। वहीं दूसरी तरफ गुरुद्वारा नीचीबाग में देर रात तक दीवान सजाया गया। दीवान समाप्ति पर गुरुद्वारा, बड़ीसंगत, नीचीबाग के ग्रंथी अमरप्रीत सिंह ने अरदास की और इस दौरान गुरू का अटूट लंगर बरताया गया।
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