रामनगर। अयोध्या में हर तरफ खुशी छाई हुई थी। पुष्पवर्षा हो रही थी। दूसरी तरफ गूंज रहे थे वैदिक मंत्रोच्चार। सभी को इंतज़ार था प्रभु राम के राज्याभिषेक के उस महान पल का। जो जल्द आने वाला था। गुरू वशिष्ठ ने जैसे ही तिलक लगाकर मर्यादा पुरुषोत्तम का राज्याभिषेक किया चारों तरफ गूंज उठी जय जयकार और तीनों लोक मे छा गया हर्षोल्लास। बुधवार की भोर में लीला की महाआरती होगी।
मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध रामनगर की श्रीरामलीला के 29 वें दिन प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की लीला मंचित हुई। उत्तर कांड के 11ग से 31 तक के दोहा की लीला हुई। लीला के मोहक मंचन ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। राज्याभिषेक के महान पल को देखने के लिए दूर-दूर से भारी भीड़ उमड़ी थी। लीला की शुरूआत होती है श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी से। दरबार सजा रहता है। वहां गुरु वशिष्ठ के अलावा वीर हनुमान, सुग्रीव, अंगद समेत सभी दरबारी जन मौजूद रहते हैं । तैयारी पूरी होते ही महर्षि वशिष्ठ प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक करते हैं । माता कौशल्या समेत अन्य माताएं उनकी आरती उतारती हैं । इस दौरान परंपरा के अनुसार काशिराज के प्रतीक अनंत नारायण सिंह राजतिलक भेंट करते हैं। श्रीराम अपने गले की माला उतार कर उन्हें पहनाते हैं। प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की खुशी तीनों लोक में छा जाती है। सभी देवी-देवता उनकी जय जयकार करते हैं। चार वेदों का आगमन होता है और वह वेद वचन कह कर ब्रह्मलोक चले जाते हैं। सभी देवता के बाद आते है महादेव आशीष देकर कैलाश चले जाते हैं । राज्याभिषेक के बाद श्रीराम सुग्रीव, विभीषण, जामवंत, अंगद, नल, नील को बुलाकर उन्हें वस्त्र-आभूषण देकर विदा करते हैं। वीर हनुमान अपने प्रभु के पास रुक जाते हैं। निषादराज भी प्रणाम कर अपने घर चले जाते हैं। भगवान राम सीता सहित सिंहासन पर अर्ध रात्रि तक विराजमान रहते हैं। भक्तगण उनके दर्शन कर अपने नेत्र सुफल करते हैं।