वाराणसी। नाविकों की हड़ताल जारी रहने से नए साल का जश्न फीका पड़ सकता है। अधिकारियों के साथ वार्ता विफल रहने पर नाविकों ने नए साल के पहले दिन गंगा में नौका संचालन से इनकार कर दिया है। हड़ताली नाविकों ने सोमवार को नावें बांधकर क्रूज को रोकने का प्रयास भी किया। नाविक प्रदेश सरकार की गंगा में क्रूज चलाने की योजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
नए साल पर काफी संख्या में पर्यटक नौका विहार का आनंद लेते हैं और दूसरी पार गंगा की रेती पर मौज मस्ती करते हैं। मगर नाविकों की हड़ताल जारी रहने से पर्यटक मायूस हैं। सोमवार को अधिकारियों ने दो बार नाविकों से वार्ता की। प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया और नावें चलाने का अनुरोध भी किया। मगर नाविकों ने सिर्फ मौखिक आश्वासन को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने गंगा में नावों की कतार बांधकर क्रूज को भी रोकने का प्रयास किया।
काशी में करीब 1000 नावें हैं। नवंबर से फरवरी तक पर्यटन सीजन होता है और इस दौरान नाविक अच्छी कमाई कर लेते हैं। एक अनुमान के अनुसार नौका संचालन से इस सीजन में रोज करीब 5 लाख रुपये का कारोबार होता है। नाविकों का कहना है कि प्रदेश सरकार की क्रूज योजना उनकी रोजी रोटी पर कुल्हाड़ी चलाने जैसी है। पदाधिकारियों ने बताया कि सोमवार की सुबह डीएम सुरेंद्र सिंह से वार्ता हुई लेकिन उन्होंने मांगों को बाद में सुनने और पहले हड़ताल समाप्त करने की बात कही। इस पर नाविकों ने हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया। शाम के समय एसीएम प्रथम सीईओ सहित कई पुलिस के अधिकारी आए लेकिन उन्होंने भी 2 दिन का धरना समाप्त कर नाव चलाने और उनकी मांगों पर विचार करने की बात कही। मगर इस मौखिक आश्वासन से नाविक नहीं माने। माझी समाज के राकेश साहनी ने कहा कि हम लोगों की हड़ताल से पर्यटकों को काफी परेशानी हुई है, मगर यह हमारी रोजी-रोटी का सवाल है। हम लोग भी इस दो दिन की कमाई के लिए साल भर इंतजार करते हैं। इस दौरान शंभू साहनी, तन्ना निषाद, बाबू साहनी, पृथ्वी साहनी, बबलू मांझी, सरजू मांझी, प्रदीप साहनी और मनीष साहनी आदि उपस्थित रहे।
गरीब परिवारों को समाज दे रहा पैसा
नाविकों में कुछ तो अच्छे संपन्न हैं, लेकिन ज्यादातर काफी गरीब परिवार हैं, जो प्रतिदिन की दिहाड़ी से ही परिवार का भरण पोषण करते हैं। ऐसे में चार दिन से हड़ताल कर रहे नाविक परिवारों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। नाविक बबलू साहनी ने कहा कि समाज के सदस्यों ने ऐसे परिवारों का ध्यान रखा है, जिनकी आजीविका ही नाव से चल रही है। उनके परिवार के खर्च के लिए संगठन की ओर से मदद दी जा रही है।