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जश्न में डूबी संत की जन्मस्थली

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वाराणसी। तीन दिन तक चलने वाले जयंती समारोह की शुरुआत से पहले ही रविवार को सीर गोवर्धन स्थित संत रविदास की जन्मस्थली जश्न में डूब गई। कहीं नाचते-गाते श्रद्धालुओं की टोलियां तो कहीं भजन-कीर्तन और अमृतवाणी की गूंज। अनवरत चलता लंगर और कतार में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु। आस्था और उल्लास के बीच सीर गोवर्धन में हर तरफ रौनक उतर आई है। तीन किलोमीटर परिक्षेत्र में मेला सज गया है। चरखी-झूले के साथ सैकड़ों दुकानें लगी हैं। सोमवार को बेगमपुरा स्पेशल ट्रेन से डेरा सच्च खंड बल्लां के गद्दीनशीं संत निरंजन दास अनुयायियों के जत्थे के साथ काशी पहुंचेंगे।
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कैंट रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालु उनकी अगवानी और स्वागत करेंगे। यहां से काफिला सीर गोवर्धन स्थित रविदास मंदिर पहुंचेगा। जयंती समारोह की तैयारियां मुकम्मल होने के साथ ही सीर में हर तरफ जश्न का माहौल है। मंदिर से लेकर मेला क्षेत्र तक मिनी पंजाब की झलक देखने को मिल रही है। सड़क के दोनों तरफ दुकानें सज चुकी हैं। चरखी और झूले भी लगाए गए हैं। वहीं, श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। भक्तों के भोजन-पानी और ठहरने के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। अटूट लंगर चलाया जा रहा है। 30 जनवरी को श्री गुरु रविदास स्मारक पार्क में संत निरंजन दास दीप प्रज्जवलित करेंगे। पूरे पार्क को दीयों से सजाया जाएगा। 31 जनवरी को मुख्य आयोजन होगा। नगवा स्थित पार्क में संत की प्रतिमा पर माल्यार्पण और रविदासिया धर्म का ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके साथ ही 17 जनवरी से चल रहे अमृतवाणी पाठ की पूर्णाहुति हो जाएगी। सीर के मुख्य पंडाल में संतों के प्रवचन और कीर्तन के साथ ही मंदिर क्षेत्र में झांकियां निकाली जाएंगी।
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