वाराणसी। शहीदे करबला इमाम हुसैन की चार साल की बेटी जनाबे सकीना की याद में दरगाहे फातमान में नौचंदी जुमेरात पर मौला अली के रौजे से अजादारों ने अलम उठाया जो बीबी फातमा, इमाम हुसैन और गंज शहीदा से होते हुए मौला अब्बास के रौजे पर पहुंचा। यहां हुई मजलिस को खिताब करते हुए शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने कहा कि 1380 साल पहले जनाबे सकीना की शहादत ने पूरी दुनिया को जो हौसला बख्शा था वो आज भी कायम है। इमाम हुसैन की चार साल की बच्ची को याद करने के लिए बड़ी तादाद में मर्द व ख्वातीन दरगाह में हाजिर हुए। शहादत के जिक्र पर लोगों की आंखें जारोकतार रो पड़ीं। मजलिस के बाद बुनियाद हुसैन, शब्बीर हैदर, शाहीन हुसैन, जौहर हुसैन, वकार रिजवी आदि ने नौहा व मातम किया। शायर इमरान हैदरी ने कलाम पेश किया। दरगाह के मुतवल्ली अब्बास रिजवी शफक ने जाइरीन का इस्तकबाल किया। इसके पूर्व की मजलिस को मौलाना फजले अब्बास ने खिताब किया। अंजुमन हुसैनिया ने नौहा व मातम किया। वहीं मदनपुरा में मौलाना गुलजार हुसैन ने मजलिस पढ़ी। दालमंडी में शाहिद अली के निवास पर मौलाना तहजीबुल हसन ने मजलिस पढ़ी। अर्दली बाजार में आखिरी मजलिस मरहूम नाजिम अकबर के इमामबाड़े पर हुई।