लमही। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 31 जुलाई को मनाई जाने वाली जयंती इस बार खास होगी। जयंती के लिए लमही गांव संवरने लगा है। प्रशासन के साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। गांव के स्कूल में नुक्कड़ नाटक की तैयारी शुरू हो गई है। उद्यान की सफाई कराई जा रही है। पोखरे और रामलीला स्थल की भी सफाई आरंभ हो चुकी है।
मुंशीजी की जयंती पर मुंशी प्रेमचंद के आवास की दीवारों पर फाइन आर्ट्स के छात्र-छात्राएं कथा सम्राट की कहानियों के किरदारों को जीवंत करेंगे। सिर्फ 15 मिनट में हीरा मोती, गबन, गोदान, रंगभूमि, पंचपरमेश्वर और मंत्र के किरदारों से छात्र-छात्राएं रुबरू होंगे। नमक का दरोगा, निर्मला और मैकू आदि कहानियों के बारे में छात्र-छात्राएं जानेंगे। यही नहीं, ऑडियो विजुअल शो के माध्यम छात्र-छात्राओं को कथासम्राट के संपूर्ण जीवन की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
वीडीए बनाएगा ऑडियो विजुअल ऑडी
वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की ओर से लमही में ऑडियो विजुअल ऑडी बनाया जाएगा। इसमें एक रुपये के टिकट से बच्चे उनकी कहानियों को देख सकेंगे। वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद के पोखरे पर एक दुकान के माध्यम से मुंशी जी की कहानियों में अंकित सामान जैसे ईदगाह का चिमटा और लकड़ी व मिट्टी के बर्तन आदि बेचे जाएंगे। रविवार को स्मारक भ्रमण के दौरान खरे ने यह जानकारी दी। कहा, योजना को 31 जुलाई से पहले मूर्तरूप दिया जाएगा।
‘मंगलसूत्र’ है ‘गुप्त धन’ नहीं
मुंशी प्रेमचंद स्मारक न्यास की ओर से संचालित पुस्तकालय में मुंशी प्रेमचंद के अलावा अन्य लेखकों की पुस्तकें भी हैं। पुस्तकालय की स्थिति अच्छी नहीं है। न्यास के अध्यक्ष सुरेशचंद्र दूबे कहते हैं कि पुस्तकालय का संचालन निशुल्क है। इसमें पुस्तकों की संख्या बहुत कम है। प्रशासन और साहित्यकारों द्वारा पुस्तकों का योगदान किया जाना चाहिए। वह मुंशी प्रेमचंद के पहले उपन्यास ‘मंगलसूत्र’ को दिखाते हुए दुखी मन से कहते हैं कि अगर कोई हमसे मुंशी जी की ‘गुप्त धन’ मांगे तो वह उपलब्ध नहीं है।
चबूतरे-कुएं से लेकर पोखरा तक होगा सूचीबद्ध
वाराणसी। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद से जुड़ी निशानियां लमही गांव में ‘हेरिजेट विलेज’ के रूप में संरक्षित की जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लमही गांव का अस्तित्व बचाने के लिए रविवार को काम शुरू हो गया। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने लमही गांव के स्वरूप, परिवेश और वहां मौजूद धरोहरों पर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा से जानकारी ली। डीएम ने नियमावली के तहत लमही को धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया आरंभ कराने के लिए कहा है।
अब संस्कृति विभाग कथा सम्राट के गांव को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भी प्रस्ताव तैयार कराएगा। यह प्रक्रिया मुंशी प्रेमचंद 31 जुलाई को जयंती मनाने के बाद अगले पखवारे पूरी की जाएगी। संस्कृति विभाग का मानना है कि यूनेस्को के बनाए मानक के अनुरूप लमही गांव की संस्कृति और ख्याति बन चुकी है।
लमही को धरोहर गांव घोषित कराने के लिए मुंशी प्रेमचंद के घर के पास का कुआं, चबूतरा, तालाब के अलावा शोध केंद्र को सूचीबद्ध किया जाएगा। यह भी अध्ययन किया जा रहा है कि लमही में गांव के रूप में अभी तक बचा क्या-क्या है। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख ने बताया कि लमही को हेरिटेज विलेज घोषित कराने के लिए अगले पखवारे दस्तावेजीकरण कराया जाएगा।