आजमगढ़। मानसून ने पिछे तीन दिनों से जिले पर काफी मेहरबान है। रविवार के बाद सोमवार को भी जिले चार घंटे जमकर बारिश हुई। इस दौरान जगह-जगह जलभराव से शहर का स्वरूप टापू से दिख रहा था। लगातार बारिश से जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। जलभराव ने नगरवासियों की मुसीबत में जहां इजाफा किया। वहीं, धान की रोपाई में जुटे किसानों को राहत रही।
रविवार को भी जिले में अच्छी बारिश हुई थी। सोमवार सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए थे। बीच-बीच में हल्की फुहारें से पड़ रही थी. दोपहर 12 बजे से जोरदार बारिश शुरू हुई, जो शाम को चार बजे थमी। भारी बारिश से शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। बारिश एक बार फिर नगरपालिका के नाला सफाई और जलभराव न होने से दावों को अपने साथ बहा ले गई।
नगर के एसकेपी इंटर कालेज के सामने, आराजीबाग, गांधी प्रतिमा, रैदोपुर, बदरका ईदगाह, डीएवी मैदान, पहाड़पुर, गोयल कालोनी, रोडवेज आदि के पास जलजमाव से शहरवासी जूझते दिखे। पानी पूरे दिन सड़क पर जमा रहा। जिला अस्पताल स्थित परिसर की स्थिति काफी बुरी रही। सीएमओ कार्यालय, कुष्ठ कार्यालय में पानी भरा रहा। मलेरिया आफिस तक में पानी भर गया।
इससे कर्मचारियों के साथ ही मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी। जिला अस्पताल के सामने दुकानों में भी पानी घुसने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ब्रह्मस्थान, तकिया, नरौली और सिधारी के निचले इलाकों में भी पानी भरने से लोगों को मुसीबतों में इजाफा हो गया। सबसे ज्यादा परेशानी आवागमन करने वालों को हुई। जल-जमाव वाले क्षेत्र से गुजरने वाले लोग कपड़ों को बचाने की फिराक में कीचड़ से होकर गुजरने को विवश होना पड़ा।
कालोनी में भरा पानी, निकलना हुआ दूभर : शहर के निचले इलाकों में बने कालोनियों में मार्ग पर पानी भरने से शहरवासियों का घर से निकलना दूभर हो गया। ब्रह्मस्थान, गोयल कालोनी में लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। वहीं, पालिका ओर से आराजीबाग में नाले की उंचाई सड़क से ज्यादा कर देने से सड़क से पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। बारिश का पानी नाले में नहीं पहुंच पा रहा है।
रोपाई कार्य ने पकड़ी तेजी : जुलाई में अच्छी बारिश के साथ धान की रोपाई ने तेजी पकड़ ली है। पिछले तीन दिन से जिले में काफी अच्छी बारिश हुई है। इसके बाद किसान रोपाई को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। जून माह में बारिश न होने से किसानों के सामने अपनी धान की नर्सरी को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई थी। किसान ट्यूबवेल के सहारे धान की नर्सरी को बचाने में जुटे थे।