वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ दूबे ने कहा कि पंचकर्म आयुर्वेद की ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो जटिल रोगों को जड़ से दूर करती है। पंचकर्म में 50 से अधिक क्रियाएं होती हैं, जिससे कफ, पित्त और वात को संतुलित किया जाता है। बुधवार को वह श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग के दुर्गाकुंड स्थित दम्मानी भवन में प्रदेश के पहले तुलसी पंचकर्म केंद्र के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
कहा कि पंचकर्म विधि मानसिक रोग के इलाज में भी कारगर है। अध्यक्षता करते हुए मेयर राम गोपाल मोहले ने कहा कि इस केंद्र के खुलने से स्वस्थ भारत अभियान को गति मिलेगी। इसका लाभ काशी के लोगों को मिलेगा। केेंद्र के चिकित्सक डॉ. हेमंत शर्मा ने लघु फिल्म के माध्यम से पंचकर्म के बारे में जानकारी दी। पतंजलि योग पीठ हरिद्वार की ओर से योग की क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून के कुलपति विशिष्ट अतिथि प्रो. सत्येंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। प्रो. जीएस त्रिपाठी ने कहा कि पंचकर्म में आहार और दिनचर्या का उपाय बताया जाता है। संचालन ज्योति दूबे ने किया। धन्यवाद विपिन अग्रवाल ने दिया।