वाराणसी। धार्मिक नगरी में पतित पावनी के तट पर सब्जी की दुकानों के बीच मछली की दुकानें सज रही हैं। श्रद्धालु चाहे गंगा स्नान के लिए जा रहे हों या लौट रहे हों, उन्हें दुर्गंध का सामना तो करना ही पड़ता है, आस्था पर भी आघात होता है। लेकिन कमाई के चक्कर में नगर निगम इन दुकानों को नहीं हटवा रहा है।
जिस शहर का नाम सुनते ही लोगों में धार्मिक भावनाएं जागृत हो जाती हैं, वहां के हालात देख देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी हैरत में पड़ जाते हैं। सबसे पुनीत घाटों में से एक दशाश्वमेध घाट पर पहुंचने से पहले ही उनका सामना मछलियों से उठने वाली दुर्गंध से होता है। वैसे तो यहां सब्जी की दुकानें सजती है, लेकिन इन्हीं के बीच मछलियां भी बिकती हैं। यह दुकानें सड़क घेर लेती हैं, जिससे पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वह यहां पुण्य कर्मों के लिए आते हैं, लेकिन यहां की स्थिति चौंकाने वाली है। घाट के पास के हालात देख मन को ठेस पहुंचती है। चूंकि वह एक-दो दिन के लिए आते हैं, इसलिए शिकायत नहीं कर पाते हैं। स्थिति को सुधारने के लिए जिम्मेदार लोगों को विचार करना चाहिए।
दशाश्वमेध घाट के रास्ते में लगने वाले सब्जी बाजार के बीच में ही लगभग एक दर्जन दुकानें ऐसी हैं, जिसमें मछली का कारोबार होता है। इन दुकानों पर गंगा के अलावा मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बंगाल सहित कई प्रदेशों से आने वाली मछलियां बेची जाती हैं। नगर निगम चाहता तो यह दुकानें यहां से दूसरी जगह शिफ्ट कर सकता है, लेकिन चंद रुपयों के लिए इसे खुले में लगवाया जा रहा है।