वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर के दौरे पर जितनी बार आए, ध्वस्त यातायात व्यवस्था को लेकर जमकर नाराजगी जताए। मगर, मुख्यमंत्री की नाराजगी से ट्रैफिक पुलिस बेपरवाह बनी हुई है। नतीजतन, शनिवार को मुख्यमंत्री की मौजूदगी के बीच शहर का ऐसा कोई प्रमुख इलाका नहीं बचा था जहां राहगीरों को जाम से जूझना न पड़ा हो। हालत यह रही कि नदेसर क्षेत्र में वरुणा पुल के समीप ट्रैफिक पुलिस को नाकाम देख सेना के जवानों को मदद के लिए आगे आना पड़ा। वहीं, मंडुवाडीह क्षेत्र में महज 800 मीटर दूरी का सफर तय करने में 40 मिनट का समय लगा। इन हालात में आगामी जनवरी महीने में प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पटरी पर कैसे आएगी, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
पांडेयपुर ओवरब्रिज से पहड़िया तक सुबह से ही भीषण जाम लगा हुआ था। पांडेयपुर से आजमगढ़ मार्ग पर सीवर का कार्य किए जाने के कारण बसों को काली मंदिर की तरफ मोड़ दिया गया था। इस वजह से वाराणसी-गाजीपुर मार्ग जाम की जद में आ गया। आजमगढ़ से आने वाले छोटे-बड़े वाहनों को लालपुर पुलिस चौकी से भक्ति नगर, काली मंदिर की तरफ मोड़ दिया गया था इस वजह से पूरे क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतार लगी रही। हालत यह रही कि पुलिस लाइन से लेकर पांडेयपुर ओवरब्रिज, काली मंदिर और पहड़िया मंडी के आगे तक वाहन जाम में फंसे रहे।
सिपाहियों और होमगार्ड की तैनाती के बावजूद शाम के समय मंडुवाडीह चौराहा से मंडुवाडीह थाने के आगे तक और नेवादा से भिखारीपुर तिराहा हुए ककरमत्ता तक घंटों जाम क्यों लगा रहा, यह किसी को समझ में नहीं आया। महमूरगंज-रथयात्रा, सिगरा से फातमान होते हुए मलदहिया तक, गोदौलिया से चौक होते हुए मैदागिन, कबीरचौरा, लहुराबीर, नई सड़क, लोहा मंडी, विश्वेश्वरगंज और भोजूबीर सहित शहर के अन्य इलाकों में भी जाम की ऐसी ही स्थिति रही। कोई सड़क के बीचोंबीच बेतरतीब तरीके से रखे गए डिवाइडर को जाम का कारण बना रहा था तो कोई अतिक्रमण और वाहन पार्किंग के व्यवस्था के अभाव को कोसता नजर आया।