वाराणसी। दिन में तेज धूप और रात में सर्दी का अहसास। पिछले एक सप्ताह से न्यूनतम तापमान 16-17 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 34-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। दूसरी तरफ मौसम में बदलाव के साथ आबोहवा भी खराब गई है। हवा में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) की स्थिति मानक से दोगुनी ज्यादा तक पहुंच गई है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार रात के तापमान में गिरावट से हवा नम होकर भारी हो रही है। धूल के कण ऊपर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसी हवा में सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। अस्पतालों में भी सर्दी, खांसी और गले में संक्रमण आदि के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टर भी मानते हैं कि जगह-जगह खुदाई से उड़ रही धूल से फेफड़ों में संक्रमण से अस्थमा के मरीजों की परेशानी ज्यादा हो गई है। उन लोगों की मुश्किल ज्यादा है, जो पहले से दमा और एलर्जी से पीड़ित हैं।
मंडलीय अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 1000 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं। इन दिनों ईएनटी, फिजीशियन, चेस्ट फिजीशियन के पास सर्दी, खांसी, गले में खराश और आंखों में जलन से पीड़ित लोग ज्यादा पहुंच रहे हैं। इसी तरह बाल रोग विभाग की ओपीडी में भी निमोनिया, पेट संबंधी बीमारी के पहुंच रहे हैं। बीएचयू में टीबी चेस्ट विभाग की ओपीडी भी 100-150 की होती है। यहा भी धूल-धुआं से संक्रमण वाले मरीज पहुंच रहे हैं।
मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव के मुताबिक इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। बदलते मौसम में बच्चों में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है। सर सुंदरलाल अस्पताल के टीबी चेस्ट डिपार्टमेंट के डॉ. जीएन श्रीवास्तव ने बताया कि सड़कों पर उड़ने वाली धूल से बचने की जरूरत है। धूल अंदर जाने पर बलगम, नाक से पानी, जकड़न, आंखों में जलन की आशंका रहती है। बीएचयू में क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के प्रमुख प्रो. एमके सिंह ने बताया कि इस समय को कंजेक्टेवाइटिस के लिए अनुकूल मानते हैं। बताया, मरीज आंखों में जलन, दर्द और लाल होने की शिकायतें लेकर आ रहे हैं।