वाराणसी। डीरेका में अहंकारी रावण का दहन रिमोट से किया गया। जैसे ही रिमोट का बटन दबाया गया रावण, कुंभक र्ण और मेघनाद के पुतले धूं-धूं कर जल उठे। खेल मैदान पर इस बार रावण का पुतला 75 फुट, कुम्भकर्ण का 70 फुट और मेघनाद का 65 फुट का पुतला आकर्षण का केंद्र रहा। पुतला दहन के दौरान आकर्षक आतिशबाजी का नजारा देखने के लिए काफी दूर दूर से लोग आये थे। रावण दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक का पर्व दशहरा डीजल रेल इंजन कारखाना के केंद्रीय खेल मैदान पर धूमधाम से मनाया गया।
भगवान राम का तीर रावण की नाभि में लगते ही वह धरती पर गिर गया। देवताओं ने पुष्पवर्षा करके प्रभु श्रीराम का जयघोष किया। ढाई घंटे के रूपक को देखने के लिए खेल मैदान खचाखच भरा हुआ था। आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में लोग विजयोत्सव का साक्षी बनने पहुंचे थे। डीरेका के केंद्रीय खेल मैदान पर मानस की चौपाइयों मंगल भवन अमंगल हारी की धुन गूंजते ही शंकर, पार्वती, गणेश, नारद आदि पात्र प्रवेश करने लगे। प्रभु श्रीराम अपनी वानरी सेना के साथ प्रवेश करते हैं तो रावण राक्षसी सेना के साथ। मंच से व्यास और वाचक के संवाद पर पात्र अभिनय करते हैं। जिस देख लो भगवान राम के जयकारे लगाने लगते हैं। इससे पूर्व डीरेका के विद्युत इंजीनियर सुधीर रंजन ने पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इनसेट
मोनोएक्टिंग पर आधारित रूपक में हुआ संवाद
डीरेका में रामलीला के मंच से भारतीय लोक संगीत की सभी विधाओं के गीत जैसे चैता, कजरी, निर्गुण, पूर्वी, कहरवा, बेलवैया आदि को समाहित कर कुल 15 गीतों व संवाद पर सधे अंदाज में अभिनय किया गया। विजया दशमी समिति डीरेका की तरफ से सात अक्टूबर को रामलीला का उद्घाटन किया गया था।