वाराणसी/लोहता। हजरत कासिम की याद में सातवीं मोहर्रम मंगलवार को मेहंदी का जुलूस सैयद कासिम रिजपी की निगरानी में चौहट्टा लाल खां से उठा। अलम, मेहंदी और दुलदुल की जियारत को लोग उमड़े रहे। जुलूस उठने के पहले डॉ. शफीक हैदर ने मजलिस को खिताब किया। अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन अंसारे हुसैनी, अंजुमन आबिदिया ने दर्द भरे नौहे पेश किए।
जुलूस चौहट्टा लाल खां से कटरा दारा शिकोह, पठानी टोला, इमाम बाड़ा मीर घूरा शरीफ होते हुए सदर इमामबाड़ा पहुंचकर देर रात समाप्त हुआ। जुलूस में नफीस हाशिम, सुनताल अहमद, शामिल रिजवी, सैयद आमिल हुसैन, लईक हैदर, डॉ. कैसर हुसैन आदि शामिल रहे। वहीं छोटे मेहंदी का जुलूस इमामबाड़ा सर फजले अली के इमामबाड़े से उठा। अंजुमन चिरागे अली व अंजुमन आबिदिया ने नौहाख्वानी की।
इससे पहले छठवीं मोहर्रम सोमवार को कच्चीसराय से उठा दुलदुल का ऐतिहासिक चालीस घंटे का जुलूस दूसरे दिन भी कई इलाकों से होकर गुजरा। हाथी व ऊंट के साथ दुलदुल व अलम के जुलूस की जियारत करने को दूसरे दिन भी हुजूम उमड़ा रहा। अंजुमन जव्वादिया के जेरे इंतजाम उठे इस जुलूस में शहनाई पर मातमी धुन पेश कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की गई। मुतवल्ली सैयद इकबाल हुसैन एडवोकेट व लाडले हसन की देखरेख में डठे इस जुलूस में हिंदू व मुस्लिम भाइयों ने दुलदुल को दूध पिलाकर मन्नत मांगी।
उधर, लोहता में मोहर्रम के सातवें दिन सद्दा का जुलूस पुलिस प्रशासन के निगरानी में निकला। जुलूस कन्हई सराय, रहीमपुर, धमरिया, अलावल, मीना बाजार से होते हुए लोहता चौराहे पर पहुंचा।