भदोही। पिपरी की मौर्य बस्ती में रविवार को तहसील प्रशासन की ओर से मकान जमींदोज किए जाने के बाद 28 परिवारों के लिए सोमवार की सुबह रोज से अलग रही। मिट्टी, पेड़-पौधे और वहां की आबोहवा तो वही थी, लेकिन अपना ही गांव बेगाना लग रहा था। इन परिवारों की रात खुले आसमान के नीचे गुजरी। कार्रवाई के जद में आए लोगों का कहना था कि प्रशासन तानाशाह की तरह हो गया है। बताया कि वे 1942 से यहां आबाद थे।
बेदखल किए गए रामचंद्र मौर्य ने कहा कि भूमि संख्या 438 का रकबा दो बीघा 13 बिस्वा 16 धूर है। वर्ष 1942 की चकबंदी में इसे आबादी के रूप में दर्ज करने का आदेश हुआ था। 122बी के तहत हमारे पक्ष में फैसला भी हुआ था। धारा 152 में आपत्ति दर्ज कर आबादी के रूप में दर्ज कराना था, जो वर्ष 1989 में सिविल जज के यहां से खारिज हो गया था। इसके बाद हम सभी लोगों ने जिला जज की शरण ली थी। बेघर हुए मिठाई लाल, रमेश, शंभू लाल, लोलारख मौर्य आदि ने बताया कि हम लोगों को कम से कम कार्रवाई की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए थी। उनका कहना था कि एक ओर सरकार भूमिहीनों को आवास देने का ढिंढोरा पीट रही है तो दूसरी ओर आबाद गरीबों के घर उजाड़ रही है। इस अन्याय के खिलाफ हम लोग पुन: न्यायालय जाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री के दरबार में गुहार लगाएंगे। 28 घरों के लगभग एक दर्जन बच्चे सोमवार को स्कूल नहीं जा पाए।