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लुटेरे हैं मगर सरकार के पहरों में रहते हैं0

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वाराणसी।
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बीएचयू छात्र कल्याण केंद्र की ओर से एंफीथिएटर ग्राउंड में शनिवार को आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों का दिल जीत लिया। इसमें जहां कुछ कवियों ने व्यंगात्मक कविता के माध्यम से लचर व्यवस्थाओं पर प्रहार किया तो कुछ ने मां की ममता से लेकर प्रेम के अलग-अलग भावों को रेखांकित किया।
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छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह, प्रो.केके सिंह के देखरेख में आयोजित कविता का शुभारंभ कार्यवाहक कुलपति डॉ. नीरज त्रिपाठी ने किया। शाम 5 बजे से शुरू होकर तीन घंटे से अधिक समय तक चले सम्मेलन में मुंबई से आए सागर त्रिपाठी ने ‘ना जाने कौन सी मिट्टी से मां का जिस्म बनता है, जो बच्चा छींक दे तो मां को खांसी आने लगती है’। के माध्यम से मां की ममता का गुणगान किया। लखनऊ के अली वाहिद ने ‘मुस्कुरा दो तुम तो मर जाए हम जिंदगानी नहीं चाहिए, बस मोहब्बत के योगी है हम, राजधानी नहीं चाहिए’। गाजियाबाद से आए कमलेश भट्ट ने ‘वो खुद ही जान लेते हैं, बुलंदी आसमानों की। परिंदों को नहीं तालीम दी जाती उड़ानों की’। अभिनव अरुण ने ‘ना समझो आसमानी बोलता हूं मै गालिब की निशानी बोलता हूं’। कुशीनगर से आए राजेश राही ने कहा कि ‘लुटेरे हैं मगर सरकार के पहरों में रहते हैं, बड़े बहुरुपिए अक्सर बड़े शहरों में रहते हैं’। इसके अलावा अशोक कुमार सिंह की कविता ‘जहां अपने पते पे लापता रहते हैं सारे लोग उसको शहर कहते हैं’ ने लोगों को प्रभावित किया। इससे पहले छात्रों ने भी अपनी कविताओं की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का संचालन कवि हरिनारायण सिंह, प्रो. वशिष्ठ अनूप आदि मौजूद रहे।
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