वाराणसी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तृतीय अश्वनी कुमार दुबे की अदालत ने किराएदार को जलाकर मार डालने के आरोप में अभियुक्त मकान मालिक कोनिया निवासी रणधीर उर्फ टीपू को दोषी पाने पर 10 वर्ष के कठोर कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त को छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि में से आधी धनराशि पीडि़ता को दिए जाने का आदेश भी दिया है। अदालत में अभियोजन की तरफ से डीजीसी अनिल कुमार सिंह, एडीजीसी रामसकल यादव और सर्वेंद्र सिंह ने पक्ष रखा।
अभियोजन के मुताबिक वादिनी यशोदा देवी 24 दिसंबर 2014 को आदमपुर थाने में तहरीर दी थी। तहरीर में कहा गया था कि पति के मौत के बाद सात-आठ वर्ष से वह हरदोई के सदई बेहा गांव निवासी रिक्शा चालक गफूर के साथ कोनिया निवासी अभियुक्त रणधीर उर्फ टीपू के मकान में किराए पर रहती थी। आरोप है 24 दिसंबर 2014 को दिन में साढ़े नौ बजे मकान मालिक रणधीर उर्फ टीपू बकाया किराया 500 रुपये की मांग गफूर से करने लगा। इसे लेकर दोनों में विवाद होने लगा। गुस्से में आकर अभियुक्त रणधीर ने गफूर के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर घर के अंदर ही आग लगा दिया। आग से वह गंभीर रूप से झुलस गया। शोर सुनकर वादिनी के साथ आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से झुलसे गफूर को उपचार के लिए शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया जहां उपचार के दौरान उसकी उसी दिन देर रात मौत हो गई। मृत्यु से पूर्व मृतक ने मजिस्ट्रेट के समझ अपना बयान दर्ज कराया था जिसमें उसने अभियुक्त रणधीर उर्फ टीपू पर जलाने का आरोप लगाया था। अदालत ने मृतक के मृत्यु पूर्व दिए बयान के आधार पर अभियुक्त को दोषी पाते हुए सजा सुना दी।