वाराणसी। ध्रुपद तीर्थ तुलसी घाट पर ध्रुपद मेले में गंगा के तट पर सुर, लय ताल की त्रिवेणी तीसरी निशा में बहती रही। मंगलवार को श्रोताओं ने ध्रुपद के सुरों और पखावज की धुन का आनंद उठाया। तीसरे दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के छात्र-छात्राओं के ध्रुपद वृंद गायन से आरंभ किया। गायन की पहली प्रस्तुति में डागर बानी शैली में राग भूपाली में निबद्ध आलापचारी के साथ चारताल में निबद्ध रचना तू ही सूर्य, तू ही चंद्र रही। समापन राग चंद्रकौस में सूलताल में निबद्ध डागर घराने की पारंपरिक रचना शंकर गिरिजापति...से किया। पखावज पर काशी के युवा वादक शुभम गुजराती और युगल गुजराती ने संगत की।
ध्रुपद मेले की दूसरी प्रस्तुति में लखनऊ से आए पं. राजखुशी राम के एकल पखावज वादन से हुई। उन्होंने नाना पानसे घराने की विशेष प्रस्तुति ताल धमार में विविध लयकारियों के स्वरूप को प्रस्तुत किया। पखावज पर प्रशांत तथा हारमोनियम पर पं. जमुना बल्लभ गुजराती ने संगत की। तीसरी प्रस्तुति में डा. मधुचंदा ने अपने गायन से समा बांधा। डा. मधुचंदा ने गायन का आरंभ राग आभोगी में निबद्ध धमार से कैसे तुम हो मूरख श्याम...से किया। इसके उपरांत उन्होंने सूलताल में त्वं ब्रहाणी, त्वं ही रुद्राणी... से वादन का समापन हुआ। पखावज पर पं. श्रीकांत मिश्र के शिष्य आदित्यदीप ने संगत की। मेले की निशा की चौथी प्रस्तुति में पखावज वृंद वादन पं. अखिलेश गुंदेचा और उनके शिष्य ऐब ने प्रस्तुत किया। इस दौरान अनुजा बोरुडे, ज्ञानेश्वर देशमुख और रमेश चंद्र जोशी ने सहयोग किया। इससे पूर्व सोमवार की मध्य रात्रि में पं फाल्गुनी मित्रा का गायन प्रभावी रहा। इसके उपरान्त वाराणसी के वरिष्ठ वादक पं. रवीन्द्र गोस्वामी का सुरबहार वादन रसपूर्ण रहा। इसके उपरांत कोलकाता से पधारे पं देवज्योति बोस का सरोद वादन हुआ। अगली प्रस्तुति में मुम्बई से पधारे वरिष्ठ कलाकार पं. पुष्पराज कोष्ठी का सुरबहार वादन प्रभावी रहा। इसी क्त्रस्म में महाराष्ट्र से पधारे वरिष्ठ बादक पं उद्धव शिंदे ने स्वतंत्र पखावज वादन पेश किया। दिल्ली से पधारे कलाकार अजय प्रसन्ना ने बांसुरी वादन से श्रोताओं को संगीत की मिठास से रससिक्त कर दिया। पं. भक्तराज भोसले एवं उनके सुपुत्र ऋतुराज भोसले ने पखावज जुगलबंदी की प्रस्तुति से विभोर किया। राजकुमार झा ने अपने घराने की परनो की दमदार प्रस्तुति से सभी को आनंदित किया। इसी क्त्रस्म में सिलीगुड़ी बंगाल से पधारे बाल कलाकार अरिजीत बनर्जी ने स्वतंत्र पखावज वादन की प्रस्तुति से सभी को चमत्कृत कर दिया। अन्त में सिलीगुड़ी से पधारी कलाकार केया बनर्जी ने गायन की प्रस्तुति से सभी को विभोर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।