वाराणसी। धार्मिक-सांस्कृतिक नगरी काशी के प्राचीन घाट भी अब अतिक्रमण की जद में हैं। गंगा आरती के नाम पर घाटों पर कब्जा किया जा रहा है। आरती के नाम पर घाटों पर शुरू हुआ यह खेल उनकी मौलिकता को धीरे-धीरे लील रहा है। शहर में जनता जाम और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही है। विकास के नाम पर हो रहे अनियोजित कार्यों का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
चांदपुर स्थित कार्यालय में शनिवार को आयोजित ‘अमर उजाला संवाद’ में शनिवार को शहर के शिक्षाविदों ने ऐसी तमाम समस्याओं को रेखांकित किया और शहर की अगली ‘सरकार’ से उम्मीद की कि वे लोगों को इन समस्याओं के मकड़जाल से मुक्त कराएंगे। वक्ताओं ने कहा कि पांच साल में न तो शहर को जाम से मुक्त किया जा सका और न ही पार्किंग की व्यवस्था हुई। सड़कों पर अब भी अतिक्रमण है। शहर के विकास की ठोस कार्ययोजना बनाने और उसे मूर्त रूप देने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है।
जनता अब सुगम यातायात, साफ-सुथरी सड़कों, जाम से मुक्ति और पीने के साफ पानी की उम्मीदों के साथ शहर की अगली सरकार की ओर आस भरी निगाहों से देख रही है। शहर के मेयर और पार्षदों को इन समस्याओं को समझना होगा और इन्हें दूर करने के लिए सतत प्रयास करने होंगे।