वाराणसी। लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव, किसी भी चुनाव में जनता से वोट लेने के बाद पार्टी और प्रत्याशी भूल जाते हैं। इस बार भी नगर निकाय चुनाव में जनता की समस्याओें से कोई जनप्रतिनिधियों का कोई मतलब नहीं है। जनता को भी विकास न करने वालों को सबक सिखानी चाहिए। लेकिन जनता भी चुनाव में भूल जाती है। जनता को वोट के माध्यम से जनप्रतिनिधियाें को जगाने की जरूरत है। यह कहना है मतदाताओं का। लोगाें का कहना है कि बिजली, सड़क और पानी की समस्याएं हैं लेकिन कोई भी राजनीतिक दल इसे अपना प्रमुख मुद्दा नहीं बनाया है। बस जीत कैसे हो इस पर जोर लगा रहे हैं और जनता के बुनियादी मुद्दे पीछे छूट गए हैं।
चुनाव जीतने के बाद अध्यक्ष बड़े नेता बन जाते हैं। फिर उनका जनता से कोई लेना देना नहीं रहता। विकास के नाम पर वोट मांगने वाले नाली, खड़ंजा के कार्य को छोटा समझने लगते हैं। ओमप्रकाश गुप्ता, गंगापुर
किसी भी दल ने विकास को मुद्दा नहीं बनाया है। जनता को भी चुनाव में मुद्दे नहीं भूलना चाहिए। विकास करने वालों को निष्पक्ष होकर मतदान करें तभी अच्छे जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। ह्रदय नारायण सिंह, गंगापुर
चुनाव कैसे जीतें, सभी दलों के प्रत्याशियों की नजर सिर्फ इस पर है लेकिन जनता की क्या समस्याएं हैं इस पर कोई राजनैतिक दल ध्यान नहीं दे रहा है। जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। पंकज पांडेय, रामनगर
जनप्रतिनिधियों का जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है, अब चुनाव सिर्फ अपने राजनैतिक फायदे के लिए चुनाव लड़ते हैं। बुनियादी दिक्कतों से किसी का कुछ नहीं लेना है। बलवंत नारायण झा, रामनगर
नगर निकाय चुनाव में किसी भी दल ने अब तक बिजली, पानी और सड़क को मुद्दा नहीं बनाया है। जबकि यहां सड़कें खराब हैं। गलियों में ईंट उखड़ गई है। सीवेज लाइन नहीं है। संजय यादव, रामनगर
किसी भी दल ने मूलभूत समस्याओं को मुद्दा नहीं बनाया है। चाहे वह बिजली हो या साफ पानी का मसला। कई इलाकों में सीवेज पाइप लाइन की दिक्कत हैं। सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। केदार शंकर उपाध्याय