राजातालाब। गंगापुर बाजार निवासी हारुन की धर्म में गहरी आस्था है चाहे वह हिंदू धर्म हो या मुस्लिम धर्म। धर्म को वह मानव के उत्थान के लिए जरूरी बताते हैं। हारुन का कहना है कि धर्म व्यक्ति के आध्यात्मिक शांति के लिए है। संस्कार निर्मित करने के लिए हैं। हारुन की सोच साफ है-धर्म वाणी का विषय नहीं है यह बुद्धि से परे है। मन के ऊपर है।
अपने पुत्र मुनव्वर के साथ गंगापुर बाजार में रहने वाले हारुन मूल डीह बंजारी गंगापुर के मूल निवासी हैं। अपने घर पर रामचरित मानस, बाइबिल, यथार्थ गीता और कुरान को रखने और पढ़ने वाले हारुन को जब कोई रामायण पर चर्चा के लिए आमंत्रित करता है, तो वह उसमें खुशी-खुशी सम्मिलित होते हैं। रविंद्र सिंह, रामानंद यादव, जयप्रकाश कमल आदि के साथ हर शनिवार को रामचरित मानस की चर्चा करने से इनको सुखद अनुभूति होती है। कहां कि रामचरित मानस की व्याख्या कर उन्हें शांति और सुकून मिलता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाइयों और दोहों का निचोड़ प्रस्तुत करते हुए हारुन कहते हैं कि वह धर्म धर्म नहीं हो सकता, जिसमें विवाद हो या जिसके कारण विवाद हो। बताते हैं कि वह बचपन से ही अपने गांव में पड़ोस के कमला पंडित के संपर्क में आ गए थे। उनसे अध्यात्म की बहुत सी बातें सीखी और वेदों की जानकारी भी उन्हीं से प्राप्त हुई। हारुन को पूर्व में गांव के ही वैद्य जमोहनदर दूबे का सानिध्य मिला। इन्हें रामचरित मानस के दोहों और चौपाइयों का गहरा ज्ञान है। कहते हैं कि रामचरित मानस का अध्ययन करने से व्यक्ति नीति और धर्म के रास्ते पर चलकर नैतिक ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। तुलसीदास जी ने इंद्रियों पर नियंत्रण को विशेष ध्यान दिया है।
रामचरित मानस की चौपाइयों से लगाव के कारण ही बड़ी बारी में बच्चा सिंह के वह अक्सर अपने दोस्तों के साथ मानस के दोहों और चौपाइयों की व्याख्या करते देखे और सुने जा सकते हैं। तामस बहुत रजोगुण थोड़ा कलि प्रभाव विरोध चहुं ओरा की व्याख्या करते हुए कहते हैं-मन की तीन दशाएं हैं जिसमें सत रज और तम है। यह चौपाई मन के अंतर के ज्ञान का पट खोल देती है। यह भी बताया कि कुरान में लिखा है कि जिसने मन को नहीं जाना वह अपने खुदा को भी नहीं पहचान सकता।