वाराणसी। नौकरशाहों के नकारेपन ने शहर का ही बेड़ा गर्क नहीं किया, बल्कि वीडीए की सीमा में आने वाले आसपास के इलाकों में भी अवैध निर्माणों की बाढ़ ला दी। आपको हैरानी होगी कि जमीन के इस खेल में बड़े-बड़े डेवलपर्स और ग्रुप हाउसिंग कंपनियां शामिल हैं। इन्होंने न तो वीडीए से कॉलोनियों का लेआउट पास कराया, न ही प्लाटिंग से पहले एप्रूवल लिया। किसानों को विकास का सब्जबाग दिखाकर ली गई जमीन तिगुने-चौगुने दाम में बेची जा रही है। यह खेल शहर इर्द-गिर्द सभी जगह फैला हुआ है। खासकर एनएच-टू पर मोहन सराय से अलीनगर तक डेवलपर्स ने कंक्रीट का जंगल तैयार करने की पूरी तैयारी कर ली है।
मोहन सराय से अलीनगर तक हाईवे किनारे डेवलपर्स ने किसानों के साथ ही खरीदारों के साथ करोड़ों का खेल खेला है। किसानों से तीन से पांच लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से जमीन खरीदी। अब 15 से 20 लाख रुपये प्रति बिस्वा के हिसाब से उसकी प्लाटिंग कर रहे हैं। कभी जहां धान की फसल लहलहाया करती थी वहां अब प्लाटिंग हो चुकी है। प्लाटिंग के नाम पर यहां ईंट और पत्थर का घेरा बना दिया गया है। खरीदारों को बाकायदा झांसा देकर रुपये ऐंठे गए कि वीडीए सब कुछ एप्रूव्ड है लेकिन अब वीडीए की कार्रवाई से हुए खुलासे ने खरीदारों के होश उड़ा दिए हैं।
रविवार को जब अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो ढहाए गए डेवलपर्स के कार्यालयों के आसपास सन्नाटा पसरा था। डेवलपर्स के एजेंट, कर्मचारी सब नदारद थे। मोहन सराय से अली नगर के बीच सिंधीताली, जिवधीपुर और एकौना में हाईवे के दोनों किनारों पर कई अवैध कॉलोनियां आबाद दिखीं। वहीं सैकड़ों एकड़ में प्लांटिंग का काम अभी जारी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रोजाना डेवलपर्स के कार्यालय गुलजार रहा करते थे। खरीदारों की आवाजाही लगी रहती थी लेकिन कार्रवाई के बाद से कोई नजर नहीं आया। मनमाने तौर पर जमीन की खरीद-फरोख्त के अलावा खेती की जमीन पर कॉलोनियां आबाद होने की कसक लोगों में साफ दिखी लेकिन बड़े डेवलपर्स और भूमाफिया के दबाव से वे कुछ भी कहने या बताने से कतराते रहे। हां, यह जरूर कहा कि वीडीए और पुलिस की जो कार्रवाई शनिवार को हुई, वह काफी पहले होनी चाहिए थी। अब तो सैकड़ों लोग डेवलपर्स के जाल में फंस चुके हैं। वीडीए के मुताबिक 1990 के बाद से अब तक किसी भी डेवलपर्स ने कॉलोनी के लिए लेआउट पास नहीं कराया है। बिना वीडीए के एप्रूवल के कोई डेवलपर्स कॉलोनी विकसित नहीं कर सकता।